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भारत में 50 थर्मल प्लांट ‘क्रिटिकल’: कोयला स्टॉक 25% से नीचे; सरकार बोली- सप्लाई खत्म नहीं हुई

नई दिल्ली। देश के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक तेजी से घट रहा है। 2 सितंबर तक 50 पावर यूनिट्स में कोयले का भंडार गंभीर स्तर पर पहुंच गया था। यह जानकारी केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों से सामने आई है।

कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ने की चिंता है। इस बीच देश में बिजली की मांग भी बढ़ी है। मानसून के कारण कोयले की सप्लाई और परिवहन भी प्रभावित हुआ है।

कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा- सभी अहम प्लांट पर अधिकारियों की एक अंतर-मंत्रालयी टीम रोजाना नजर रख रही है। उन्हें लगातार ईंधन की सप्लाई की जा रही है। 50 प्लांट में से 45 घरेलू ईंधन पर चलते हैं, चार इम्पोर्टेड कोयले के लिए बने हैं। एक वॉशरी रिजेक्ट्स यानि कोयला धोने की प्रक्रिया से निकले बेकार कोयले पर चलता है।

क्या है कोयले की कमी की वजह?
थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक कम होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें बिजली की बढ़ी मांग, मानसून और कोयले की सप्लाई में रुकावट प्रमुख हैं। गर्मी के कारण कूलिंग और सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ी। इससे पावर प्लांट्स में कोयले की खपत भी बढ़ गई।

स्टॉक क्यों घटा?

  • ☀️ गर्मी बढ़ी → बिजली की मांग बढ़ी
  • बिजली की खपत बढ़ी → कोयले की खपत बढ़ी
  • 🌾 सिंचाई और कूलिंग की मांग → बिजली का इस्तेमाल ज्यादा हुआ
  • 🌧️ मानसून में सप्लाई प्रभावित → कोयले की ढुलाई में रुकावट
  • 🚆 सप्लाई बाधित → प्लांट्स में कोयले का स्टॉक घटा

50 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर
CEA के आंकड़ों के मुताबिक, 50 थर्मल पावर यूनिट्स में कोयले का स्टॉक गंभीर रूप से कम है। कुछ प्लांट्स में उपलब्ध स्टॉक तीन दिन से भी कम समय तक बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त माना जाता है। अगस्त के अंत तक भी स्थिति दबाव में रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महीने के अंत में 51 प्लांट्स क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में थे।

‘क्रिटिकल’ का मतलब सप्लाई खत्म होना नहीं
कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, इन प्लांट में कोयले का स्टॉक तय मानक के 25% से कम है। इसी वजह से इन्हें ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है।

अधिकारी ने कहा कि यह CEA की निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन प्लांट में कोयले की सप्लाई खत्म हो रही है। इन पर ज्यादा निगरानी रखी जाती है और जरूरत के हिसाब से प्राथमिकता पर कोयला भेजा जाता है।

रोज 2.4 MT कोयले की जरूरत
अधिकारियों के मुताबिक, 85% प्लांट लोड फैक्टर पर इन पावर प्लांट की सामान्य जरूरत करीब 3.1 मिलियन टन (MT) कोयला रोजाना मानी जाती है। वास्तविक खपत करीब 2.4 MT प्रतिदिन है। हर साल मानसून के दौरान कोयले की सप्लाई प्रभावित होती है। सितंबर में बारिश कम होने के साथ स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।

बिजली उत्पादन जारी रखने के लिए कुछ कोयला आधारित प्लांट को तय मेंटेनेंस टालने के लिए कहा गया है। इससे फिलहाल बिजली उत्पादन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सरकार ने बढ़ाई कोयले की सप्लाई
कोयले की कमी को देखते हुए सरकार ने पावर प्लांट्स तक सप्लाई बढ़ाने के कदम उठाए हैं। Coal India की कुछ सहायक कंपनियों को कोयला लोडिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। कैप्टिव माइंस से भी सप्लाई बढ़ाई जा रही है। सरकार कोयला, बिजली और रेलवे मंत्रालयों के साथ मिलकर सप्लाई की निगरानी कर रही है।

क्या बिजली कटौती का खतरा है?
फिलहाल सिर्फ कोयले के कम स्टॉक के आधार पर देशभर में बिजली कटौती की बात कहना सही नहीं होगा। सरकार सप्लाई बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है।

अगर कोयले की सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट रहती है और बिजली की मांग लगातार बढ़ती है, तो कुछ पावर प्लांट्स पर उत्पादन का दबाव बढ़ सकता है।

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