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उज्जैन-गरौठ हाईवे का 500 मीटर हिस्सा फिर बनेगा: शुरू होने से पहले धंसी सड़क; GVR कंस्ट्रक्शन को हटाने के निर्देश

उज्जैन। देवास रोड और रेलवे ट्रैक के बीच बने ब्रिज का एक हिस्सा शुरू होने से पहले ही फिर से धंस गया। इससे पहले भी ब्रिज से निर्माण सामग्री गिरने का वीडियो सामने आया था। घटना के बाद जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस ब्रिज की लागत 2600 करोड़ थी।

अब 17 मीटर ऊंचे इस हाईवे का लगभग 500 मीटर हिस्सा नए सिरे से बनाया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों ने निर्माण एजेंसी को निर्देश भी दिए हैं। गुणवत्ता में लापरवाही को लेकर नाराजगी भी जताई गई है।

निर्माण में सामने आई खामियों के बाद एजेंसी GVR ने सोमवार से क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने का काम शुरू कर दिया है। जेसीबी से सड़क की परतें उखाड़ी जा रही हैं। निकली मिट्टी को दूसरी जगह ले जाकर डंप किया जाएगा।

तकनीकी जांच में कमियां मिलने के बाद संबंधित हिस्से को पूरी तरह हटाया जा रहा है। इसके बाद दोबारा मजबूत आधार तैयार किया जाएगा। फिर सड़क का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा।

136 किलोमीटर का हाईवे अभी अधूरा
उज्जैन-गरौठ हाईवे प्रोजेक्ट की तय समयसीमा करीब एक साल पहले समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद 136 किलोमीटर लंबे मार्ग का एक हिस्सा अब भी अधूरा है। प्रोजेक्ट के दो पैकेज पूरे हो चुके हैं। वहीं चंदेसरी-खेड़ा खजूरिया के 41 किलोमीटर हिस्से का निर्माण अभी बाकी है। करीब 900 करोड़ रुपए के इस पैकेज का काम GVR कंस्ट्रक्शन के पास है। यातायात शुरू होने से पहले ही सड़क धंसने की घटना सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

500 मीटर हिस्से पर फिर शुरू हुआ काम
GVR कंपनी के सीनियर इंजीनियर अमित राय के मुताबिक, ब्रिज की गुणवत्ता जांच के लिए IIT दिल्ली से तकनीकी परीक्षण कराया गया था। जांच में कुछ तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद करीब 500 मीटर हिस्से को खोलकर नए सिरे से निर्माण करने का फैसला लिया गया है। कंपनी के अनुसार लगभग 100 से 200 मीटर हिस्से में समस्या अधिक नजर आई है। हालांकि, सुरक्षा को देखते हुए पूरा 500 मीटर क्षेत्र दोबारा बनाया जाएगा। यह मार्ग अभी यातायात के लिए शुरू नहीं हुआ है। आरओबी का काम भी दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।

2027 से पहले शुरू हो सकता है आवागमन
उज्जैन-गरौठ हाईवे पर अभी रेलवे ब्रिज का करीब 500 मीटर हिस्सा ही बाकी था। इसे दिसंबर महीने तक पूरा करने की तैयारी थी। इसी बीच रेलवे ब्रिज के पास का 500 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। अब इसे तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है। इससे हाईवे को हैंडओवर करने में अब अधिक समय लग सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसी दौरान सड़क का कोई दूसरा हिस्सा क्षतिग्रस्त न हो जाए।

अगर ऐसा हुआ तो आगामी सिंहस्थ में इस मार्ग के उपयोग को लेकर भी संशय खड़ा हो सकता है। NHAI उज्जैन के पीडी शिवम शर्मा ने बताया कि उज्जैन-गरौठ हाईवे के क्षतिग्रस्त हिस्से का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। जांच के बाद दोबारा निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि 31 मार्च तक हाईवे पर आवागमन शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल क्षतिग्रस्त 500 मीटर हिस्से को हटाने का काम चल रहा है।

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