‘साड़ी नहीं होती तो पता नहीं क्या होता’: नेपाल बाढ़ में ऐसे बची 21 श्रद्धालुओं की जान; 36 अब भी लापता

चेन्नई। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड में 21 तमिल श्रद्धालु बाल-बाल बच गए। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। अचानक पहाड़ से पानी, कीचड़ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे। देखते ही देखते रास्ता मलबे से भर गया। इन 21 लोगों की जान बचने की कहानी भी बेहद खास है। मुश्किल वक्त में एक साड़ी उनके लिए जिंदगी की रस्सी बन गई।
“हम चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। मैं भी दो-तीन बार फिसलकर नीचे आ गई। ढलान कच्ची थी और उस पर चढ़ना हमारे लिए बहुत मुश्किल था। हमें पहाड़ पर चढ़ने की आदत भी नहीं थी।”
नेपाल की भीषण फ्लैश फ्लड से बचकर लौटी एक महिला श्रद्धालु ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उस वक्त उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे ऊपर पहुंचें। तभी उनकी रिश्तेदार पूनगोडी ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी की जान बचा दी।
“पूनगोडी वहां अकेली थीं और उन्होंने साड़ी पहन रखी थी। उन्होंने पहले अपना स्वेटर पहना और फिर साड़ी उतार दी। इसके बाद उन्होंने अपनी साड़ी नीचे हमारी तरफ कर दी। साड़ी काफी मजबूत थी। हम महिलाओं ने उसे पकड़ लिया और उसी के सहारे ऊपर चढ़ने लगे।”
उस समय चार-पांच महिलाएं नीचे फंसी हुई थीं। पुरुष पहले ही ऊपर पहुंच चुके थे। महिलाओं के लिए कच्ची और फिसलन भरी ढलान पर चढ़ना मुश्किल था। सत्या नाम की एक महिला तो डर की वजह से हिम्मत हारने लगी थीं।
“अगर हमारे पास वह साड़ी नहीं होती तो पता नहीं क्या होता। उसी साड़ी की मदद से हम ऊपर चढ़ पाए और अपनी जान बचा सके। हमें ऊपर पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा।”
एक साधारण साड़ी उस वक्त इन महिलाओं के लिए सिर्फ कपड़ा नहीं थी। वह उनकी जिंदगी की रस्सी बन गई थी।

ड्राइवर ने ऊंचाई पर जाने को कहा
ये श्रद्धालु 57 लोगों के ग्रुप का हिस्सा थे। सभी तीन बसों से नेपाल के रसुवा जिले में सफर कर रहे थे। 26 अगस्त को ग्रुप स्याफ्रुबेसी से चीन सीमा की ओर जा रहा था। इसी दौरान अचानक पहाड़ों से मलबा गिरने लगा।
पहले लोगों को लगा कि धूल का गुबार उठ रहा है। इसके बाद तेज आवाज सुनाई दी। कुछ ही देर में पानी और मलबा तेजी से नीचे आने लगा। ड्राइवर ने तुरंत बस रोक दी। उसने सभी यात्रियों को बाहर निकलने और ऊंचाई पर जाने को कहा।
तीन घंटे पैदल चलकर पहुंचे हेलिकॉप्टर तक
ऊंचाई पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स के कैंप में ले जाया गया। वहां उन्हें पानी और बिस्किट दिए गए। अगले दिन उन्हें हेलिकॉप्टर से निकालने की तैयारी हुई। इसके लिए उन्हें करीब तीन घंटे पैदल चलना पड़ा।
रास्ते में कांटेदार झाड़ियां और संकरी पहाड़ी पगडंडी थी। एक गलती जानलेवा हो सकती थी। एक नेपाली व्यक्ति ने रास्ता दिखाने में उनकी मदद की। आखिरकार सभी हेलिकॉप्टर तक पहुंचे। वहां से उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

36 लोग अब भी लापता
21 लोग सुरक्षित चेन्नई लौट आए हैं। लेकिन इसी 57 सदस्यीय ग्रुप के 36 लोग अब भी संपर्क में नहीं हैं। इसके अलावा चेन्नई से गया 49 श्रद्धालुओं का एक और ग्रुप भी लापता बताया गया है।
तमिलनाडु सरकार के मुताबिक राज्य से 400 से ज्यादा लोग नेपाल गए थे। इनमें कई लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। रेस्क्यू के लिए भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं।