भागीरथपुरा कांड में 20 लाख मुआवजे की मांग: हाईकोर्ट बोला- समय पर पाइपलाइन बदलते तो नहीं होती मौतें; रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। हाईकोर्ट में पेश की गई जांच रिपोर्ट के बाद याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।
वकीलों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना चाहिए।
पाइपलाइन बदलने में देरी को माना अहम कारण
जांच रिपोर्ट के सामने आए अंशों में पाइपलाइन बदलने में हुई देरी को भी हादसे की अहम वजह माना गया है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों के मुताबिक, अगर समय रहते पाइपलाइन बदल दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। वकीलों ने इसी आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

36 मौतों को लेकर भी सवाल
भागीरथपुरा कांड में हुई मौतों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुल 36 मौतों के मामले में जांच रिपोर्ट के सामने आए अंशों में 24 मौतों को दूषित पानी से जोड़ने की बात सामने आई है। इसको लेकर भी याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
मृतकों के परिजनों के लिए 20 लाख मुआवजे की सिफारिश
रिपोर्ट में दूषित पानी कांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की सिफारिश की गई है। वहीं, प्रभावित लोगों के लिए 5 लाख रुपए की सहायता की सिफारिश सामने आई है। हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मुआवजे की राशि को बढ़ाने की मांग की है।
पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में पेश की गई जांच रिपोर्ट की पूरी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि अभी रिपोर्ट के कुछ अंश ही सामने आए हैं। ऐसे में पूरी रिपोर्ट सामने आना जरूरी है। याचिकाकर्ता रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों को हाईकोर्ट में चुनौती देने की भी तैयारी में हैं। मामले में अब जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर सुनवाई के दौरान पक्ष रखा जाएगा।