उज्जैन में मुस्लिम महिलाओं ने UCC पर पुनर्विचार की मांग की: मुस्लिम लॉ पर होगा असर; बोली- धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकार

उज्जैन। मध्यप्रदेश विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 को लेकर जामा मस्जिद में मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने रविवार को कार्यक्रम आयोजित किया।
इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। महिला प्रतिनिधियों ने प्रावधानों पर अपनी चिंताएं रखीं। उन्होंने राष्ट्रपति नाम ज्ञापन भेजकर UCC विधेयक पर दोबारा विचार करने की मांग उठाई।
इस दौरान, महिलाओं के हाथों में तिरंगे और संदेश लिखी तख्तियां दिखाई दीं। महिलाओं ने अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
मुस्लिम पर्सनल लॉ को ध्यान में रखकर बनाए विधेयक
महिलाओं का कहना था कि समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रावधानों पर चर्चा करते समय मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक परंपराओं से जुड़े पहलुओं को भी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समझना जरूरी है। कमेटी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर संविधान के अनुच्छेद 25, 44 समेत अन्य प्रावधानों का हवाला दिया।
विधेयक का मुस्लिम लॉ पर होगा असर
ज्ञापन में धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बताते हुए समान नागरिक संहिता को नीति-निर्देशक तत्व का हिस्सा बताया गया। कमेटी ने कानून बनाने से पहले सभी समुदायों और प्रभावित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श की मांग की। इस दौरान ज्ञापन में विवाह, तलाक, विरासत, पंजीयन, लिव-इन संबंध और बहुविवाह से जुड़े प्रावधानों पर चिंता जताई गई। कमेटी ने कहा कि इनका मुस्लिम पर्सनल लॉ पर असर पड़ सकता है।
धार्मिक परंपराओं से जुड़े पहलुओं को भी समझना जरूरी
कार्यक्रम में डॉ. फौजिया अंजुम ने मुस्लिम महिलाओं से समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रावधानों को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि समानता के साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक परंपराओं से जुड़े पहलुओं को भी समझना जरूरी है। पार्षद नाजिया कुरैशी ने कहा कि महिलाएं विवाह और पारिवारिक कानूनों से जुड़े सवालों पर स्पष्टता चाहती हैं। वहीं शाइस्ता परवीन शेख ने संविधान और मौलिक अधिकारों के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत बताई।
राष्ट्रपति से पुनर्विचार की मांग
मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को लेकर राष्ट्रपति से पुनर्विचार की अपील की है। कमेटी ने धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ प्रभावित समुदायों से व्यापक चर्चा की मांग की। जामा मस्जिद में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। महिला प्रतिनिधियों ने मंच से UCC के प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं और विचार साझा किए।