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उज्जैन में बाबा महाकाल का तिरंगे से तिलक: भस्म आरती में हुआ अद्भुत श्रृंगार; 3 रंगों की रोशनी से जगमगाया मंदिर

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का उल्लास सबसे पहले देखने को मिला। तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया।

पूरे मंदिर परिसर को तिरंगे के रंगों से सजाया गया। मंदिर के शिखर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराता नजर आया। देशभक्ति और भक्ति के इस अद्भुत संगम ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महाकाल दरबार में गूंजते जयघोषों के बीच आजादी के पर्व का उत्साह देखने लायक रहा।

वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन कर खोले कपाट 
महाकाल मंदिर मे तड़के भस्म आरती मे कपाट खोले गए। सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन कर घंटी बजाकर भगवान से आज्ञा लेकर सभा मंडप वाले चांदी के पट खोला गया। गर्भगृह के पट खोलकर पुजारी ने भगवान का श्रृंगार उतार कर पंचामृत पूजन के बाद कपूर आरती की।

पंचामृत से पूजन के बाद शृंगार 
इसके बाद भगवान महाकाल को जल से अभिषेक करने के पश्चात दूध, दही, घी, शक़्कर शहद फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। उसके पश्चात पुजारी ने भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।

महाकाल के दरबार से हुई उत्सव की शुरुआत
बाबा महाकाल को पुजारी द्वारा तिरंगे के रंग मे रंगा विशेष तिलक भी धारण आभूषण के रूप मे अर्पित कर भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाई गई. शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण की भगवान महाकाल ने किया। भस्म आरती के दौरान भगवान को नए वस्त्र अर्पित किए गए। आजादी के पर्व की शुरुआत हुई। उसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया. भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।

भस्म अर्पण के बाद साकार स्वरूप के दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती को बाबा महाकाल की आराधना में विशेष महत्व प्राप्त है।

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