‘’प्रदेश प्रकाश एक्सप्लैनर’’: पेट्रोल-डीजल पर विंडफॉल टैक्स में कटौती, समझिए आपकी जेब पर इसका क्या पड़ेगा असर?

स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विंडफॉल टैक्स घटाने का फैसला किया है। सरकार के नए आदेश के बाद पेट्रोल पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स शून्य कर दिया गया है।
लेकिन इस बड़े फैसले के बाद हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या इससे आम जनता को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं इस फैसले का पूरा गणित।
सरकार ने टैक्स में कितनी कटौती की?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, अलग-अलग ईंधन पर टैक्स की कटौती इस प्रकार तय की गई है:
- पेट्रोल: इस पर विंडफॉल टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
- डीजल: इसके निर्यात पर ड्यूटी को 25.5 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
- ATF (हवाई ईंधन): इस पर टैक्स 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी ढाई रुपये की कटौती हुई है।

क्या आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे?
जवाब है: नहीं। इस कटौती से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की दरों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। आपकी गाड़ी में डलने वाले तेल के दाम पहले की तरह ही बने रहेंगे।
आम उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतें (Retail Prices) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की औसत कीमतों और तेल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन के आधार पर तय होती हैं, जिसका विंडफॉल टैक्स से सीधा लेना-देना नहीं होता।
फिर विंडफॉल टैक्स क्या होता है और यह क्यों लगता है?
विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) एक ऐसा विशेष टैक्स है जो सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जिन्हें किसी बाहरी परिस्थिति के कारण अचानक बहुत अधिक या असाधारण मुनाफा होने लगता है।
जब रूस-यूक्रेन या ईरान-अमेरिका तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो भारत में तेल निकालने वाली (ONGC जैसी) और उसे रिफाइन करके विदेश बेचने वाली (रिलायंस जैसी) कंपनियों को भारी मुनाफा होने लगता है। इस असाधारण मुनाफे में से सरकार अपना हिस्सा लेने के लिए यह टैक्स वसूलती है। भारत में इसे पहली बार जुलाई 2022 में लागू किया गया था।
इस फैसले का फायदा किसे मिलेगा?
इस कटौती का सीधा फायदा भारत की बड़ी तेल कंपनियों और रिफाइनरी-ऑपरेटर्स को मिलेगा।
- कंपनियों का मार्जिन सुधार: निर्यात पर टैक्स कम होने से ONGC, ऑयल इंडिया और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के मुनाफे और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार देखने को मिलेगा।
- सप्लाई में स्थिरता: घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहेगी और कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा।

यह फैसला पूरी तरह कॉर्पोरेट और एक्सपोर्ट मार्केट के लिए
सरकार हर दो हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों (जो फिलहाल ब्रेंट क्रूड के लिए लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल हैं) और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा करती है। विंडफॉल टैक्स घटाने का फैसला पूरी तरह कॉर्पोरेट और एक्सपोर्ट मार्केट के लिए है, इसलिए आम आदमी को पेट्रोल-डीजल सस्ता होने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।