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इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुई शिक्षकों की नियुक्ति: परेशान हुए अभ्यार्थी; पुनर्विचार याचिकाएं वापस लेने की मांग

इंदौर। हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बावजूद अभ्यार्थी को अभी भी नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। वर्ष 2018-19 से चली आ रही उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) भर्ती प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। विज्ञान (बायोलॉजी) की एलाइड शाखाओं से स्नातकोत्तर करने वाले अभ्यार्थी अभी भी नियुक्ति पत्र के लिए परेशान हो रहे है।

यह है पूरा मामला
वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च माध्यमिक शिक्षक वर्ग-1 के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। उस समय जारी नियम पुस्तिका के अनुसार संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड की योग्यता रखने वाले अभ्यार्थी को पात्र माना गया था। इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए।

पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता पर सवाल
अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने पात्रता परीक्षा के साथ मुख्य भर्ती परीक्षा भी पास की। हालांकि अंतिम चयन और दस्तावेज सत्यापन के दौरान शिक्षा विभाग ने अलग व्याख्या करते हुए एलाइड विषयों से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता पर सवाल उठा दिया।

परीक्षा के बाद लगाई शर्त 
विभाग की ओर से यह शर्त रखी गई कि यदि अभ्यर्थी ने पोस्ट ग्रेजुएशन एलाइड विषय में किया है। तो स्नातक स्तर पर उसके पास जूलॉजी या बॉटनी विषय भी होना चाहिए। अभ्यर्थियों का दावा है कि यह शर्त मूल विज्ञापन और भर्ती परीक्षा पूरी होने के बाद लगाई गई। जिसके कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
विभाग के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता एलसी पाटनी के अनुसार, सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता की नई शर्त लागू नहीं की जा सकती।

नियुक्ति देने के निर्देश भी दिए
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांत का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियमों में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश भी दिए।

अब नियुक्ति पत्र का इंतजार
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और न्यायालय के आदेश के बाद भी नियुक्ति के इंतजार में हैं। उन्हें आशंका है कि पहले की तरह इन आदेशों को भी रिव्यू पिटीशन और अपील की प्रक्रिया में उलझाया जा सकता है। यदि न्यायालय ने उनके पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए हैं तो विभाग को नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
पुनर्विचार याचिकाएं वापस लेने की मांग
अभ्यर्थियों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि लंबित पुनर्विचार याचिकाओं को वापस लिया जाए। न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए पात्र अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर परीक्षा और पात्रता की कसौटियां पूरी कर चुके हैं। नियुक्ति में देरी उनके लिए मानसिक और आर्थिक परेशानी का कारण बन रही है। 
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