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झाबुआ पुलिस ने लापता नाबालिक लड़कियों को 20 दिन में ढूंढा: असम जाकर कार्रवाई पूरी की; 3 हजार किलोमीटर का सफर किया

झाबुआ। पिटोल पुलिस चौकी क्षेत्र से दो नाबालिग लड़कियों को पुलिस ने ढूंढ लिया है। उनको खोजने के लिए पुलिस ने 3 किलोमीटर दूर असम तक गई थी। साइबर सेल की मदद से पुलिस ने दोनों बालिकाओं को सुरक्षित ढूंढा। इसके बाद बालिकाओं को उनके परिजनों को सौंपा।

सिर्फ 20 दिन में ढूंढा
पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। सिर्फ 20 दिनों में पुलिस ने लड़कियों को ढूंढ लिया। पिटोल इलाके में रेलवे लाइन बिछाने का काम चल रहा था। असम के रहने वाले दो सगे भाई सुदीप और प्रदीप वहां काम कर रहे थे। इसी बीच दोनों की जान-पहचान स्थानीय दो नाबालिग लड़कियों से हो गई। आरोपी बालिकाओं को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। सीधे अपने गृह राज्य असम पहुंच गए।

बिना देरी किए शुरू की जांच 
पुलिस ने बिना देरी किए मामला दर्ज कर लड़कियों की तलाश शुरू कर दी थी। मामला नाबालिगों से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे प्रथमिकता दी। जांच को आगे बढ़ाने के लिए साइबर सेल की मदद ली। मोबाइल नम्बर की जांच करने के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन असम में मिलने लगी।

टीम बनाकर किया काम 
दूसरे राज्य का मामला होने के कारण पुलिस ने कोई जल्दबाजी नहीं की। पूरी योजना बनाकर एक टीम तैयार की गई। असम पुलिस से तालमेल और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। दूसरे राज्य का मामला होने से कार्रवाई पूरी करने में पुलिस को 10 दिन का समय लगा ।

पुलिस टीम में ये लोग रहे शामिल:
ASI नरेंद्र परमार, प्रधानआरक्षक दलीप डावर, आरक्षक संजू बघेल, आरक्षक नेहा मेड़ा कई राज्यों को पार कर बांग्लादेश सीमा के पास पहुंचे। पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मेघालय का सफर तय किया और तब जाकर वे असम पहुंचे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों का गांव बांग्लादेश सीमा के बिल्कुल पास वाले इलाके में था।

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