इंदौर में आचार्य सुनील सागर बोले- CJP का प्रोटेस्ट जायज; कहा साधु की बोली से करो साधु की कीमत

इंदौर। चातुर्मास में संतों के बीच बयानबाजी और मंचों पर प्रतिस्पर्धा बढ रही है। इसी बीच जैन आचार्य सुनील सागर महाराज ने मीडिया से बातचीत की कहा साधु की कीमत उसकी पहचान, प्रभाव या दिखावे से नहीं, बल्कि उसकी वाणी और आचरण से होनी चाहिए।
आचार्य ने कहा- साधु की कीमत उसकी बोली से करो। संतों के नाम पर मंचों पर हो रही होड़ और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की राजनीति अब हद से ज्यादा बढ़ गई है। प्रदर्शन और बयानबाजी का यह माहौल न समाज के हित में है और न ही संत समाज के।
दिखाया कुछ जाता है, होता कुछ और है
आचार्य सुनील सागर ने कहा कि आज के दौर में कई बार चीजों को जिस तरह प्रस्तुत किया जाता है, वास्तविकता उससे अलग होती है। उन्होंने चातुर्मास के दौरान प्रभावशाली संतों के नाम पर एकत्र होने वाले धन के उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि इस धन का इस्तेमाल केवल आश्रमों की दीवारें ऊंची करने के बजाय स्कूल-कॉलेज बनाने और समाज के पिछड़े व कमजोर वर्गों के उत्थान में किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर ही समाज से प्राप्त धन का सही अर्थों में सदुपयोग माना जाएगा।

CJP आंदोलन में युवाओं का आक्रोश जायज
जब CJP आंदोलन और युवाओं के आक्रोश का मुद्दा उठा तो आचार्य का लहजा और सख्त नजर आया। उन्होंने युवाओं के गुस्से को जायज बताते हुए पेपर लीक और व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए।
उन्होंने सवाल किया कि बार-बार पेपर लीक क्यों होते हैं? बिचौलियों और बेईमान लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर कोई व्यक्ति गुनाह करता है तो कार्रवाई के बावजूद वह कुर्सी पर क्यों बना रहता है और जेल क्यों नहीं जाता?
आचार्य ने सरकार को सलाह दी कि युवाओं की बात को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे समझकर समस्या का रास्ता भी निकालना चाहिए।
“बस सुनो, समझो और रास्ता निकालो।”
संत समाज से लेकर सरकार तक को संदेश
आचार्य सुनील सागर ने युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए। उनके बयान ने चातुर्मास के दौरान चल रही बयानबाजी के बीच सामाजिक सरोकार और व्यवस्था में सुधार की बहस को फिर सामने ला दिया।