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विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रतिभागियों से PM का संवाद: युवा बोले- जेन Z देश के लिए समर्पित; मोदी ने कहा- गांवों के विकास में योगदान दें

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 के प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा- सीमावर्ती गांव देश के आखिरी नहीं, बल्कि पहले गांव हैं। इन गांवों का विकास देश की सुरक्षा और समृद्धि दोनों के लिए जरूरी है।

जब सीमा पर बसे गांव मजबूत और विकसित होंगे, तब राष्ट्र की सुरक्षा मजबूत होगी।  स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर बनेगा। उन्होंने युवाओं से सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

देशभर के युवाओं ने लिया हिस्सा 
कार्यक्रम में देशभर के 403 युवाओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों का भ्रमण कर वहां की संस्कृति, जीवनशैली और रणनीतिक महत्व को करीब से समझा। इस दौरान युवाओं ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया, स्वच्छता अभियान में भाग लिया और भारतीय सेना के जवानों से भी मुलाकात की।

पीएम से कहा- जेन Z देश के लिए पूरी तरह समर्पित
प्रतिभागी दिव्यांशु जोशी ने कहा- “प्रधानमंत्री जी, मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपकी विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए जेन जी पूरी तरह समर्पित रहेगा। हमारे लिए Gen Z का मतलब राष्ट्र निर्माण है, चरित्र निर्माण है, सेवा है और नवाचार है। यानी जेन जी का मूल मंत्र ‘नेशन फर्स्ट’ है। हम सभी युवाओं ने सीमावर्ती गांवों के दौरे के दौरान अपने अनुभवों को दर्ज किया है और जल्द ही उनका एक विस्तृत सार आपके साथ साझा करेंगे।

मोदी ने कहा- युवा पीढ़ी भारत के गांवों को जानें
मोदी ने कहा- इस प्रोग्राम के तहत मैंने एक विचार युवाओं के सामने रखा था कि क्यों न युवा साथी वर्चुअल की बजाय जमीन पर उतरकर भारत को जानें। भारत से जुड़ें। उसको जीने की कोशिश करें, भारत को समझें। भारत के गांवों में विकसित होने के लिए कितनी आंकांक्षाएं हैं। यह गांव जाकर पता चलती है।

बॉर्डर गांवों में रहने वालों में विकास की भावना रहती है। उनके लिए देश पहले, बाकी सुविधाएं बाद में होती हैं। इसलिए इस आयोजन उद्देश्य था कि देश के अलग-अलग जिलों से युवा हिमाचल, उत्तराखंड की यात्रा करें। उनका कामकाज, संस्कृति क्या है, चुनौती क्या हैं, उसे समझें।

विकास में युवाओं की भागीदारी
पीएम मोदी ने कहा- सीमावर्ती गांवों के विकास में युवाओं की भागीदारी ही ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को देश की सीमाओं, वहां की चुनौतियों और अवसरों को समझने का अवसर देते हैं।

बॉर्डर के गांवों का जीवन कठिन
पीएम ने कहा- आपने अनुभव किया होगा बॉर्डर के गांवों का जीवन कितना कठिन होता है। फिर भी देशभक्ति को वे जीते हैं। कुछ सालों तक बॉर्डर के गावों को अंतिम गांव कहकर उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। वहां बेसिक सुविधा नहीं थी।

संभव है आपने अनेक कहानियां वहां के लोगों से सुनी होंगी। हमने ऐसी परिस्थिति में बॉर्डर गांवों के लोगों की देशभक्ति कमजोर नहीं पड़ी। हमारी सरकार ने इन गांवों को देश का प्रथम गांव माना। वे गांव जहां सूरज की पहली किरण भारत का अभिवादन करती है। जहां आखिरी किरण गुड नाइट कहती है। जहां से दुनिया भारत को पहली बार देखती है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II का दायरा बढ़ा
सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब चीन सीमा के साथ-साथ पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार से लगे सीमावर्ती गांवों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए लगभग ₹6,839 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। योजना के तहत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,954 सीमावर्ती गांवों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा।

गांवों के विकास में योगदान दें युवा
प्रधानमंत्री ने कहा- सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल आधारभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नई मजबूती देगा। उन्होंने युवाओं से इन गांवों के विकास में योगदान देने और वहां के अनुभवों को देशभर के लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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