इंदौर: स्कीम-171 को खत्म करने की मांग तेज, ₹5.84 करोड़ जमा करने के 19 महीने बाद भी नहीं मिली राहत

इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम 171 की मुक्ति के लिए करीब 19 माह पहले ही रहवासियों ने पांच करोड़ 84 लाख रुपए जमा करा दिए थे। इसके बाद भी स्कीम को मुक्त नहीं किया गया है। इसमें 13 सोसायटियों के छह हजार से ज्यादा प्लाटधारक हैं व 200 निजी भूस्वामी हैं। सीएम मोहन यादव ने करीब एक माह पहले विधायक महेंद्र हार्डिया की मांग पर इस दिशा में काम करने की बात मंच से कही थी। इसके बाद भी भोपाल से इंदौर तक कोई हलचल नहीं है।
पीड़ित प्लाटधारकों ने रखीं अपनी मांगें
इस पर पीड़ित प्लाटधारकों ने रविवार 26 जुलाई को पहले सांकेतिक विरोध रैली निकाली। फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शासन से मांगें रखीं। इसमें बताया कि साल 1993 में स्कीम 132 लागू की थी। इसमें 13 सहकारी संस्थाओं के लगभग छह हजार सदस्यों के भूखंड व 200 के लगभग व्यक्तियों की स्वयं की भूमि प्रभावित हुई थी।
हाईकोर्ट ने यह स्कीम निरस्त की तो 2009 में फिर यहीं पर 171 स्कीम लागू कर दी लेकिन विकास नहीं किया। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहवासी संघ के एनके मिश्रा, महेंद्र चतुर्वेदी, राजेश तोमर, मुकेश गुप्ता व अन्य प्लॉट धारक मौजूद थे।
33 साल में एक इंच अधिग्रहण नहीं
रहवासियों ने कहा कि इस प्रकार प्राधिकरण द्वारा स्कीम लागू करने के 33 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी न तो एक इंच जमीन का अधिग्रहण किया गया, न ही किसी प्रकार का विकास कार्य किया गया और न ही उसे मुक्त किया गया। प्लाटधारक अपने प्लाटों पर मकान नहीं बना पाए क्योंकि नक्शे ही पास नहीं हो पा रहे थे।
भूमाफियाओं ने कब्ज़ा रखें है मकान
रहवासी संघ ने बताया कि इस स्थिति का लाभ उठाकर असामाजिक तत्वों ने विभिन्न संस्थाओं के प्लाट्स पर अवैध कब्जे कर मकान बनाकर विक्रय कर दिए। कई सदस्य तो इस अवधि में अपने प्लाट का सपना देखते-देखते स्वर्ग सिधार गए। भूमाफिया अभियान के तहत तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने यहां से कब्जे हटवाए। तभी सभी पीड़ितों की रजिस्ट्री आदि की भी जांच हो गई।
राज्य शासन ने प्राधिकरण की इस मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए 17-2-2020 को विधान सभा में संशोधन कर बेवजह लंबित योजनाओं की मुक्ति का प्रावधान किया। लंबी लड़ाई के बाद आईडीए ने 23 अक्टूबर 2024 को प्रारूप जारी कर पांच करोड़ 84 लाख की राशि भरवाई, जो दिसंबर 2024 में पूरी भर दी गई। प्रावधान में साफ उल्लेख किया गया था कि प्राधिकरण द्वारा इन स्कीमों पर किए गए व्ययों की प्रतिपूर्ति होने पर स्कीम व्यपगत (लैप्स) हो जाएगी। इसके बाद भी अभी तक स्कीम को खत्म नहीं किया गया है।