इंदौर गैस ब्लास्ट केस: पुलिस ने दर्ज की पार्षद सोनी पर FIR; पार्षद बोले- टीना सिसोदिया दोषी उन पर हो कार्यवाही

विजयनगर के सुमन नगर (मंगल सिटी के पीछे) में 23 जून को हुए भीषण अवंतिका गैस पाइपलाइन विस्फोट मामले में पुलिस ने क्षेत्रीय पार्षद बालमुकुंद सोनी को आरोपी बना लिया है। हाई कोर्ट की कड़ी फटकार और एसीपी पराग सैनी की कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी के बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई है। मामले में पार्षद सोनी सहित कुल 5 लोगों शैला मैथ्यू, राजेश चाचड़ा, बालमुकुंद सोनी, कपिल शर्मा और धर्मेंद्र लोधी को आरोपी बनाया गया है। वहीं इस पूरे मामले को लेकर पार्षद सोनी का कहना है कि निगम कर्मचरी टीना सिसोदिया इसमें दोषी हैं उन पर कार्यवाही होनी चाहिए। सोनी का कहना है कि उन्होंने तकनिकी रूप से जांच नहीं की अगर वह ऐसा करती तो हादसा नहीं होता।
इंदौर के विजय नगर स्थित अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे को लेकर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिकाकर्ता एडवोकेट रितेश ईनाणी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान एसीपी ने कोर्ट में केस डायरी और जांच की प्रगति रिपोर्ट सौंपी। पुलिस के मुताबिक, पार्षद पर घोर लापरवाही का आरोप है। नीचे से अवंतिका गैस की मुख्य पाइपलाइन गुजर रही थी, इसके बावजूद बिना किसी तकनीकी जांच और अनुमति के वहां अवैध रूप से बोरिंग कराई गई। बोरिंग मशीन के पाइपलाइन से टकराते ही जोरदार धमाका हो गया था, जिसकी चपेट में आकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरी राजकुमारी झाला और विजय पटेल समेत चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुए थे और केस डायरी पेश की थी। केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने जांच की दिशा और गंभीरता पर सवाल उठाते हुए असंतोष व्यक्त किया था। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच की स्थिति ऐसी ही है तो फिर यह मामला किसी अन्य एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता क्यों न समझी जाए। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित एसीपी को स्वयं अगली सुनवाई में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए थे।

निगम की अनुमति के बिना मनमर्जी से बुलाई गई थी बोरिंग
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा गठित जांच समिति (अपर आयुक्त आकाश पाठक, असित खरे, पीएस कुशवाह) की रिपोर्ट में साफ हुआ है कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बोरिंग की स्वीकृति नगर निगम से नहीं ली गई थी। सुमन नगर का यह स्थान स्वीकृत स्थलों की सूची में शामिल ही नहीं था और न ही मौके पर निगम का कोई अधिकारी या इंजीनियर मौजूद था। कंस्ट्रक्शन कंपनी के राजेश चाचड़ा और बोरिंग एजेंट कपिल शर्मा के बयानों से खुलासा हुआ कि पार्षद सोनी ने खुद जगह चिन्हित कर जबरन बोरिंग शुरू करवाई थी। इससे पहले भी पार्षद ने अपने घर के पास रिचार्जिंग शाफ्ट बनाने की जिद की थी, जिसे निगम अमले ने अनुपयुक्त बताकर खारिज कर दिया था।
इलाज के 10 लाख के बिल पर शासन के ढुलमुल रवैये पर आपत्ति
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि अहमदाबाद में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही गंभीर रूप से झुलसी युवती का 10 लाख रुपये का अस्पताल बिल पेंडिंग है। शासन द्वारा मुफ्त इलाज के दावों के बावजूद राशि जारी नहीं की गई है। इस पर सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कहा कि शासन को रिमाइंडर भेजा गया है, जिस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर इलाज के अभाव में घायल को कुछ हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

शुरुआती लीपापोती के बाद हाई कोर्ट ने कसा शिकंजा
हादसे के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। शुरुआत में पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश करते हुए किसी तीसरे व्यक्ति के आवेदन पर मामूली धाराओं में केस दर्ज किया था और सिर्फ बोरिंग कर्मचारी को मोहरा बनाकर मशीन जब्त कर ली थी, जो बाद में जिला कोर्ट से छूट गई। पीड़ितों को इंसाफ न मिलता देख हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और पुलिस अधिकारियों को डायरी के साथ तलब किया, जिसके बाद आखिरकार रसूखदार पार्षद और ठेकेदारों को आरोपी बनाना पड़ा।
गैस पाइपलाइन में विस्फोट से कई लोग झुलस गए थे
दरअसल, 23 जून की दोपहर इंदौर के सुमन नगर जैन मंदिर के पास गैस पाइपलाइन में विस्फोट हो गया था। धमाके के साथ आग का विशाल गुबार उठा और कुछ ही सेकेंड में आसपास का पूरा इलाका इसकी चपेट में आ गया। हादसे में कई लोग झुलस गए, जिनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरी राजकुमारी झाला भी शामिल थीं।