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मानसून सत्र की शुरुआत: विपक्ष ने सरकार को घेरा, कई मुद्दों पर चर्चा की मांग

संसद भवन में आज से मानसून सत्र की शुरआत हो गई है। सभी विपक्षी ने बड़े मुद्दों पर सवाल उठाकर सरकार को घेरा है। नीट पेपर लीक , राम मंदिर चढ़ावे में कथित गबन, E20 पेट्रोल और जंतर – मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन जैसे कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग रखी। सरकार की तरफ से साफ चेतावनी दी गई है कि संसद में हंगामा करने वाली पार्टियों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुद्दों पर चर्चा के लिए सलाह-मशविरा होना चाहिए, न कि “मेरी तरफ या हाईवे” वाला रवैया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन वो सरकार पर जबरदस्ती नहीं कर सकती।” राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर जांच और जवाबदेही की मांग की थी। यह मांग सेशन के शुरू होने के साथ ही की गई।

ऑल पार्टी मीटिंग में भी यह मुद्दा उठा। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 40 पार्टियों के 58 सांसद शामिल थे। समाजवादी पार्टी के कुछ विपक्षी सांसदों ने हालिया ईंधन मूल्य बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। वहीं BJP के सहयोगी और JDU सांसद संजय झा ने वेस्ट एशिया संकट पर चर्चा की मांग की। उन्होंने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने ऊर्जा प्रबंधन अच्छा किया। दूसरे देशों की तुलना में तेल और गैस की कीमतों में कम बढ़ोतरी हुई और वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाई गई। भारत का इस संकट में कोई रोल नहीं था, लेकिन उसने इसके नकारात्मक प्रभावों को कुशलता से संभाला। बाद में BAC की बैठक में स्पीकर ओम बिरला ने सभी पार्टियों से अपील की कि वे सहयोग करें ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से चल सके।

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