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पश्चिम एशिया तनाव से नेपाल की अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट, मानव विकास पर भी खतरे की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष का गंभीर असर नेपाल की अर्थव्यवस्था, मानव विकास और रोजगार पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, रेमिटेंस, आयातित वस्तुओं और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला पर अत्यधिक निर्भरता के कारण नेपाल इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हो सकता है।

यूएनडीपी की रिपोर्ट “Military Escalation in the Middle East: Human Development Impacts Across Asia and the Pacific” में कहा गया है कि यदि दो महीने से जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो नेपाल और पाकिस्तान को मानव विकास के क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर होने से नेपाल को मिलने वाला रेमिटेंस घट सकता है, जिससे परिवारों की आय, क्रय शक्ति और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नेपाल के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, देश को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का करीब 40 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण फॉस्फेट उर्वरक के लिए जरूरी सल्फर की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे नेपाल के धान उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र नेपाल की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार माना जाता है, ऐसे में उर्वरकों की कीमत बढ़ने से खाद्य संकट गहरा सकता है।

यूएनडीपी ने बताया कि नेपाल के करीब 80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक खाड़ी देशों और मलेशिया में कार्यरत हैं। वर्तमान में कतर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में करीब 19 लाख नेपाली श्रमिक काम कर रहे हैं। हर साल विदेश रोजगार के लिए जाने वाले करीब 7 लाख नेपाली नागरिकों में से 4.5 लाख खाड़ी देशों का रुख करते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, रेमिटेंस और कृषि क्षेत्र पर असर पड़ने से नेपाल की जीडीपी वृद्धि दर घट सकती है, जिससे मानव विकास सूचकांक (HDI) के आय संबंधी संकेतकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

अर्थशास्त्री पुष्कर बज्राचार्य ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर करीब 3 प्रतिशत तक गिर सकती है, जो पिछले 70 वर्षों की औसत वृद्धि दर से कम होगी। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति, व्यापार, पर्यटन और उपभोग क्षमता पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

बज्राचार्य के अनुसार, गरीबी में बढ़ोतरी का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो नेपाल की 25 से 33 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे पहुंच सकती है

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईंधन और खाद्यान्न की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक असर महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों, कम आय वाले परिवारों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ेगा। यूएनडीपी ने नेपाल समेत दक्षिण एशियाई देशों को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए मजबूत नीतिगत ढांचा तैयार करने की सलाह दी है।

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