खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: संघर्ष से शिखर तक, बाबूलाल हेम्ब्रम ने बनाई वेटलिफ्टिंग में खास पहचान

सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद झारखंड के युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम ने अपनी मेहनत और जुनून से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। रामगढ़ जिले के एक छोटे से गांव केरिबांदा से निकलकर बाबूलाल आज खेल जगत में प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।


🏋️ संघर्ष भरी शुरुआत, मजबूत इरादे

बाबूलाल ने कोच गुरविंदर सिंह की सलाह पर वेटलिफ्टिंग को अपनाया। शुरुआती दौर में संसाधनों की भारी कमी के चलते उन्होंने निर्माण स्थलों पर बांस और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया।

बाद में उन्हें झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी के प्रशिक्षण केंद्र में मौका मिला, जहां वे रोजाना लगभग 60 किलोमीटर का सफर तय कर ट्रेनिंग लेने जाते थे।


👨‍👩‍👦 आर्थिक चुनौतियों के बीच सपना

19 वर्षीय बाबूलाल का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है।

  • मां: स्थानीय स्कूल में रसोइया
  • पिता: छोटे-मोटे काम कर परिवार का पालन

इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत जारी रखी।


🥇 उपलब्धियों से बनाई पहचान

बाबूलाल ने अपने प्रदर्शन से देशभर का ध्यान खींचा—

  • 2024: खेलो इंडिया यूथ गेम्स (चेन्नई) में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर: IWF वर्ल्ड यूथ और एशियन जूनियर/यूथ चैंपियनशिप में पदक
  • 2026: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक

यह उपलब्धियां उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दे रही हैं।

बड़ा लक्ष्य: देश के लिए खेलना

फिलहाल बाबूलाल पटियाला में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं।

उनका सपना है कि वे

  • कॉमनवेल्थ गेम्स
  • एशियन गेम्स
  • विश्व चैंपियनशिप

जैसे बड़े मंचों पर भारत का नाम रोशन करें।

Share