नेपाल-भारत के बीच हुए जैविक विविधता संरक्षण संबंधी द्विपक्षीय समझौता पर हस्ताक्षर

नेपाल और भारत के बीच जैविक विविधता संरक्षण संबंधी द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नेपाल के वन तथा वातावरण मंत्री माधवप्रसाद चौलागाईं और भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में समझौता संपन्न हुआ। नेपाल की ओर से राजदूत डॉ. शंकरप्रसाद शर्मा तथा भारत की ओर से पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते का उद्देश्य सीमा से सटे संरक्षित क्षेत्रों और जैविक कॉरिडोर में सहयोग बढ़ाना है, जहां हाथी, गैंडा और बाघ जैसे वन्यजीव निर्बाध रूप से आवाजाही करते हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत जैविक विविधता से संबंधित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों के पक्षकार हैं।

समझौते के तहत संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन, वन्यजीव अपराध नियंत्रण, अवैध शिकार रोकथाम, साझा रणनीति निर्माण, अनुसंधान और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर जनचेतना, क्षमता विकास और नियमित गश्त एवं बैठकों के माध्यम से सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

नेपाल की ओर से इस समझौते के क्रियान्वयन में वन तथा भू-संरक्षण विभाग और राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभाग सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जबकि स्थानीय स्तर पर प्रदेशों के संबंधित मंत्रालय और डिविजनल वन कार्यालय समन्वय करेंगे।

समझौते के अनुसार, जब तक किसी एक पक्ष द्वारा कूटनीतिक माध्यम से लिखित सूचना देकर इसे समाप्त नहीं किया जाता, यह एमओयू प्रत्येक पाँच वर्ष में स्वतः नवीनीकृत होगा और हर तीन वर्ष में इसकी समीक्षा की जाएगी।

यह पहल सीमा पार पर्यावरणीय सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी और दक्षिण एशिया में जैविक विविधता संरक्षण के प्रयासों को गति देगी।

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