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देशभर में 15 लाख मेडिकल स्टोर बंद, ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट्स की हड़ताल

नई दिल्ली: देशभर में 15 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बुधवार को बंद रहे। यह बंद ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और बड़ी कंपनियों के बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव के विरोध में किया गया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने इस राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया था।

ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध क्यों?

AIOCD के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा सप्लाई को दी गई छूट का अब गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि बिना पर्याप्त नियमों और निगरानी के ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म संचालित हो रहे हैं, जिससे न सिर्फ छोटे मेडिकल स्टोर्स प्रभावित हो रहे हैं बल्कि लोगों की सेहत पर भी खतरा बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान दी गई अस्थायी छूट को अब वापस लिया जाना चाहिए।

मरीजों को हुई परेशानी

हालांकि AIOCD ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे और इमरजेंसी दवाओं की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, लेकिन कई राज्यों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

पटना के IGIMS अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर बंद मिलने से मरीजों के परिजन दवाइयों के लिए भटकते नजर आए। वहीं चंडीगढ़ के PGI अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे कश्मीर के एक परिवार को दवा नहीं मिलने के कारण मेडिकल स्टोर के बाहर इंतजार करना पड़ा।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों में आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी झेलनी पड़ी।

दवा दुकानदारों की चार बड़ी मांगें

दवा विक्रेताओं के संगठन ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

1. अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक

संगठन का कहना है कि बिना स्पष्ट नियमों के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मोहल्लों की छोटी मेडिकल दुकानों को नुकसान हो रहा है और गलत दवा वितरण का खतरा भी बढ़ रहा है।

2. विवादित नियम वापस लिए जाएं

AIOCD ने सरकार के GSR 220(E) और GSR 817(E) नियमों में खामियों का हवाला देते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि इन नियमों का फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां कारोबार बढ़ा रही हैं।

3. ई-फार्मेसी के लिए सख्त नियम बनें

संगठन ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी या गलत प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) का इस्तेमाल संभव है, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए ई-फार्मेसी के लिए सख्त और स्पष्ट नियम बनाए जाएं।

4. भारी डिस्काउंट पर नियंत्रण

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां 20% से 50% तक छूट देकर बाजार पर कब्जा कर रही हैं, जिसका मुकाबला छोटे मेडिकल स्टोर नहीं कर पा रहे हैं।

देशभर में इस बंद के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर असर को लेकर चिंता बढ़ी है, वहीं केमिस्ट संगठन ने साफ किया है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे भी आंदोलन तेज किया जा सकता है।

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