उज्जैन में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा उत्सव ‘अभ्युदय’ आज से शुरू, मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन एक बार फिर युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मकता का केंद्र बनने जा रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आज से तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा उत्सव “अभ्युदय” का भव्य आयोजन शुरू हो रहा है। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा।
🎓 “युवाओं का लघु कुंभ” बनेगा अभ्युदय
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बताया कि यह उत्सव युवाओं के लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि “लघु कुंभ” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि
“हमारा उद्देश्य केवल प्रतिभा प्रदर्शन नहीं, बल्कि उज्जैन की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा से प्रदेशभर से आए विद्यार्थियों को जोड़ना है। यह उत्सव सीखने और सांस्कृतिक संवाद का बड़ा मंच बनेगा।”
🎭 800 से अधिक विद्यार्थी, 22 विधाओं में दिखाएंगे हुनर
विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. एस.के. मिश्रा ने जानकारी दी कि इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से चयनित लगभग 800 प्रतिभाशाली विद्यार्थी भाग लेंगे।
प्रतिभागी 22 सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें प्रमुख रूप से—
शास्त्रीय एवं लोक गायन
नृत्य
वाद-विवाद
नाटक
चित्रकला
साहित्यिक प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
📍 पाँच प्रमुख स्थलों पर होंगी प्रतियोगिताएं
राज्य स्तरीय युवा उत्सव की विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन के 5 प्रमुख स्थलों पर आयोजित की जाएंगी—
स्वर्ण जयंती सभागार
शलाका दीर्घा
स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी संस्थान
महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ
मुक्ताकाशी मंच (सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय परिसर)
एमपीआईएसएसआर
🚩 शोभायात्रा और उद्घाटन कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल
उत्सव के पहले दिन प्रतिभागी विश्वविद्यालयों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
🕙 शोभायात्रा: सुबह 10:00 से 11:30 बजे
(मुक्ताकाशी मंच से टॉवर चौक तक)🕦 उद्घाटन समारोह: सुबह 11:30 से दोपहर 1:00 बजे
(मुक्ताकाशी मंच, विश्वविद्यालय परिसर)
✨ सांस्कृतिक चेतना और युवा नेतृत्व का संगम
राज्य स्तरीय युवा उत्सव ‘अभ्युदय’ न केवल प्रतिभा का उत्सव है, बल्कि यह युवाओं में नेतृत्व, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। उज्जैन की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि इस आयोजन को और भी विशिष्ट बना रही है।






