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योगी मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार, 6 नए चेहरों को मिली जगह; भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इस विस्तार में छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिनमें दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री और चार को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही योगी सरकार के दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नति देकर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। यह विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजभवन स्थित जन भवन के गांधी सभागार में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद के वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। नए मंत्रिमंडल में भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। वहीं, राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल और डॉ. सोमेंद्र तोमर को प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।

इस मंत्रिमंडल विस्तार को भाजपा की सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, दलित, ओबीसी, ब्राह्मण और लोधी राजपूत जैसे प्रभावशाली सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश साफ नजर आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा ने संगठन और जातीय समीकरणों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को कैबिनेट में शामिल करना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति को साधने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुरादाबाद क्षेत्र से आने वाले भूपेंद्र चौधरी पहले भी योगी सरकार में पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फिर से बड़ी जिम्मेदारी देकर पश्चिमी यूपी में मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।

वहीं रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। मनोज पांडेय पहले समाजवादी पार्टी में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में सक्रिय थे और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर भाजपा का समर्थन किया था। रायबरेली और अमेठी जैसे क्षेत्रों में उनकी पकड़ को देखते हुए भाजपा ने उन्हें मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान दिया है।

राज्य मंत्री बनाए गए नेताओं में कृष्णा पासवान को दलित समाज, विशेषकर पासवान समुदाय के प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखा जाता है। फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर भाजपा ने पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के दलित वोट बैंक को मजबूत करने का संकेत दिया है। वहीं कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को शामिल कर लोधी राजपूत समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। वह राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले दलित परिवार से आते हैं और हाथरस व आसपास के क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। दूसरी ओर वाराणसी से विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाकर भाजपा ने गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और विश्वकर्मा समाज को साधने की रणनीति अपनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जुड़े होने के कारण उनका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

प्रमोशन पाने वाले अजीत सिंह पाल और डॉ. सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार देकर सरकार ने उनके कामकाज पर भरोसा जताया है। अजीत सिंह पाल कानपुर देहात की सिकंदरा सीट से विधायक हैं, जबकि मेरठ के डॉ. सोमेंद्र तोमर छात्र राजनीति से निकलकर भाजपा में मजबूत पहचान बनाने वाले नेताओं में शामिल हैं।

योगी सरकार के इस मंत्रिमंडल विस्तार को केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की बड़ी राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। नए चेहरों को शामिल कर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं और सामाजिक प्रभाव रखने वाले चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। आने वाले समय में इन मंत्रियों के प्रदर्शन और उनके क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव पर भी सबकी नजर रहेगी।

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