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World Lion Day : इंदौर जू देश का एकमात्र जहां जन्मे 27 शेर; इंदौर के चिड़‍ियाघर में अभी 10 वयस्क शेर

इंदौर। कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में फिलहाल 10 शेर हैं। इनमें 4 फीमेल और 2 मेल हैं जिनकी देखभाल पर सालाना 60 से 65 लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। इसमें डाइट और मेंटनेंस सहित इलाज का खर्च भी शामिल हैं। यह जानना भी दिलचस्प है कि इंदौर जू देश का एकमात्र ऐसा जू हैं जहां बीते 12 साल में 27 शेरों ने जन्म लिया है। देश के किसी भी जू में कैप्टिवेशन में इतने शावक नहीं जन्मे। वर्ल्ड लायन डे पर प्रदेश प्रकाश शेअर कर रहा है इंदौर जू की लायन स्टोरी के कुछ दिलचस्प वाकिए।

शेरों को पिंजरे में नहीं, प्राकृतिक वातावरण में रखते है  
जू क्यूरेटर एंड एजुकेशन आफिसर निहार पारुलेकर ने बताया कि इंदौर में शेरों को पिंजरे में नहीं रखा जाता बल्कि प्राकृतिक वातावरण में रखा जाता है। यहां शेरों के लिए खुले बाड़े बनाए गए हैं, जिनमें इन्हें जंगल की तरह का माहौल मिलता है। दौड़ने के लिए मैदान हैं तो पानी में अटखेलियां करने के लिए छोटा तालाब भी है। प्राकृतिक वातावरण में रहने से शेरों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इस कारण यहां शेरों का कुनबा बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। यहां से शेरों को छतबीर (पंजाब), नंदन कानन (ओडिशा), जामनगर (गुजरात), भिवानी (हरियाणा) और गदग चिड़ियाघर (कर्नाटक) और पुणे (महाराष्ट्र) भेजा गया है।

भारत का ओल्डेस्ट लायन 21 की उम्र में यहीं गुजरा
चिड़ियाघर प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार 2009 में 21 साल के शेर अकबर की मौत हुई। 15 जनवरी 1988 में इंदौर जू में जन्मा अकबर अपने रौबीले अंदाज के लिए विजिटर्स का पसंदीदा था। उसे लिवर सिरॉसिस, लकवा भी हो गया था। 5 महीने सब झेलने के बाद उसकी मौत हो गई। वहीं अकबर के बाद रानी की भी मौत हो गई थी जिसके बाद करीब 3 साल तक इंदौर चिड़ियाघर में शेर नहीं थे। 3 साल बाद एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत नवंबर 2013 में बिलासपुर जू से आकाश और मेघा को लाया गया।

सबसे पहले वर्ष 2014 में आया आकाश एवं मेघा का जोड़ा
इंदौर के चिड़ियाघर में सबसे पहले वर्ष 2014 में शेरों का जोड़ा आया था। इन्हें आकाश और मेघा नाम दिया गया। इनके आने के बाद लगातार शेरों की संख्या बढ़ती गई जबकि कई शेरों को अन्य चिड़ियाघरों को दिया गया। वर्तमान में शेरों की संख्या 10 है। यह दोनों एशियाई शेर हैं। इसके बाद इन्हीं के वंशज चिड़ियाघर में बढ़ते चले गए। आकाश और मेघा की आयु अब करीब 16-17 साल है और दोनों स्वस्थ्य हैं।

10 किलो मीट रोज़ खाते हैं, मंडे करते हैं उपवास
चिड़ियाघर प्रबंधन ने बिलासपुर से लाए शेरों के जोड़ों को कुदरती माहौल दिया। सलाखों वाले पिंजरों से निकाल उन्हें जंगल जैसा माहौल दिया। रेगुलर चेकअप और मेडिकेशन दिया। यही कारण है कि इंदौर जू में शेरों की प्रजनन दर अच्छी है और यहां एशियाटिक शेरों की संख्या 13 तक पहुंच गई। जू क्यूरेटर निहार पारुलेकर के मुताबिक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा डाइट पर खर्च होता है। मेल 10 किलो तो फीमेल 8 किलो मीट रोज खाती है। हाजमा ठीक रखने सोमवार को मीट नहीं दिया जाता। बल्कि इस दिन शेर उपवास करते हैं।

शाम को दहाड़ते हैं शेर
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव बताते हैं कि वर्तमान में हमारे पास 10 शेर हैं। इनकी चहल कदमी खास आकर्षण का केंद्र बनती है। शेर 16 घंटे आराम पसंद करते हैं। सोकर उठने के बाद शाम चार-पांच बजे के आसपास दहाड़ते हैं तो इनकी आवाज तीन किलोमीटर के हिस्से में सुनाई देती है। इसके चलते अन्य चिड़ियाघर भी शेरों के लिए इंदौर जू ही उनकी पहली प्राथमिकता रहती है।

फेक्ट फाइल
इंदौर जू में फिलहाल
शेर – 10
व्यस्क – 6
शावक – 4
मेल – 2
फ़ीमेल – 4

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