पश्चिम एशिया संकट से हिला घरेलू शेयर बाजार, सप्ताह भर में सेंसेक्स 4,354 अंक टूटा

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कारोबारी सप्ताह में बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण BSE Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सप्ताह भर में भारी गिरावट
सोमवार से शुक्रवार तक के कारोबार में सेंसेक्स 4,354.98 अंक यानी 5.51 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत टूट गया।
सप्ताह के पांच कारोबारी दिनों में केवल 10 मार्च को ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जबकि बाकी चार दिनों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
एक महीने में लगभग 10 हजार अंक की गिरावट
पिछले एक महीने में बाजार में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
11 फरवरी को सेंसेक्स 84,487.34 अंक के स्तर पर था
निफ्टी 26,009.40 अंक तक पहुंचा था
लेकिन 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में सेंसेक्स गिरकर 74,563.92 अंक और निफ्टी 23,151.10 अंक पर बंद हुआ।
इस तरह एक महीने में सेंसेक्स करीब 10 हजार अंक और निफ्टी लगभग तीन हजार अंक टूट चुका है।
लार्जकैप शेयरों में भी बड़ी गिरावट
साप्ताहिक कारोबार में बीएसई लार्जकैप इंडेक्स लगभग 5 प्रतिशत गिर गया।
इस इंडेक्स में शामिल कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
Polycab India
IDBI Bank
Larsen & Toubro
Mahindra & Mahindra
TVS Motor Company
Maruti Suzuki
UltraTech Cement
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
पिछले सप्ताह बीएसई मिडकैप इंडेक्स 4.52 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.60 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के कई शेयरों में 10 से 22 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
Adani Total Gas
Coal India
Adani Power
Tata Power
ऑटो और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
पिछले सप्ताह सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
सबसे अधिक गिरावट इन सेक्टरों में दर्ज की गई:
निफ्टी ऑटो इंडेक्स: 10.60% गिरावट
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स: 7.20% गिरावट
निफ्टी डिफेंस इंडेक्स: 7.01% गिरावट
निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स: करीब 7% गिरावट
निफ्टी मेटल इंडेक्स: लगभग 6% गिरावट
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।






