जीडीपी गणना का बदलेगा आधार वर्ष, 27 फरवरी को जारी होंगे तीसरी तिमाही के आंकड़े

केंद्र सरकार 27 फरवरी से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना का तरीका बदलने जा रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के जीडीपी आंकड़े नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार जारी किए जाएंगे।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जीडीपी की गणना का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। यह बदलाव सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है।

क्या होगा बदलाव?

नई सीरीज में अधिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ‘डबल डिफ्लेशन’ पद्धति अपनाई जाएगी और 500-600 वस्तुओं को शामिल किया जाएगा। खुदरा महंगाई के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष में बदलाव के बाद अब जीडीपी के लिए भी 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया गया है।

इस बदलाव के साथ ही 27 फरवरी को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दूसरे अग्रिम अनुमान भी जारी किए जा सकते हैं। इन अनुमानों में संशोधित आंकड़े शामिल होंगे। इसके परिणामस्वरूप पहली और दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में भी संशोधन संभव है।

पहले क्या था अनुमान?

पिछले महीने National Statistical Office (एनएसओ) द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही थी।

इसी बीच, State Bank of India (एसबीआई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

क्यों अहम है यह बदलाव?

GDP Base Year Change 2022-23 से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे विनिर्माण, सेवा और कृषि—की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक आकलन संभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नई पद्धति से आर्थिक गतिविधियों की वर्तमान संरचना बेहतर तरीके से परिलक्षित होगी।

27 फरवरी को जारी होने वाले Q3 GDP Data 27 February और संशोधित अग्रिम अनुमानों पर बाजार, निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर रहेगी, क्योंकि यह आंकड़े भारत की आर्थिक गति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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