गुरुवार और विनायकी चतुर्थी का शुभ संयोग आज, गणेश-शिव-विष्णु संग करें गुरु ग्रह की पूजा
आज 18 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की विनायकी चतुर्थी और गुरुवार का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है और इसी दिन भगवान गणेश के अवतार का स्मरण किया जाता है। वहीं गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और गुरु ग्रह (बृहस्पति) की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। ऐसे में आज का दिन गणेश, विष्णु, शिव और गुरु ग्रह की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, ज्येष्ठ मास में किए गए व्रत और पूजन अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। इस वर्ष अधिकमास के कारण ज्येष्ठ मास 59 दिनों का रहा है और वर्तमान में इसका अंतिम पक्ष यानी शुक्ल पक्ष चल रहा है। ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को होगी, जिसके साथ यह माह समाप्त होगा।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार दिन की शुरुआत स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर करनी चाहिए। इसके पश्चात घर के मंदिर में भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन कर दूर्वा, सिंदूर, पुष्प, फल और मोदक अर्पित करने चाहिए। भक्त गणेश जी के समक्ष चतुर्थी व्रत का संकल्प लेकर दिनभर उपवास रखते हैं।
इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करना भी विशेष फलदायी माना गया है। शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, चंदन और पीले पुष्प अर्पित करने के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करना शुभ माना गया है। माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गुरुवार होने के कारण गुरु ग्रह की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु शिवलिंग पर चने की दाल, हल्दी की गांठ और पीले फूल चढ़ाकर ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें। इससे ज्ञान, सम्मान और आर्थिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
इसके साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर तुलसी, पीले पुष्प और मौसमी फल अर्पित करने चाहिए। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ तथा ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्रों का जाप करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
धार्मिक मान्यता है कि विनायकी चतुर्थी और गुरुवार के इस शुभ संयोग में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
