अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बना संशय, होर्मुज और प्रस्तावित डील को लेकर बढ़ा विरोध
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हस्ताक्षर की समयसीमा और अंतिम सहमति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
मशहद में विरोध प्रदर्शन
ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में शनिवार को कुछ प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्रालय के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित समझौते और विदेश मंत्री अब्बास अरागची की भूमिका को लेकर नाराजगी जताई। कुछ कट्टरपंथी समूहों का मानना है कि संभावित समझौता ईरान के रणनीतिक हितों के अनुरूप नहीं हो सकता।
समझौते पर विरोधाभासी बयान
अमेरिकी पक्ष की ओर से समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं, जबकि ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि किसी संभावित समझौते पर हस्ताक्षर की तिथि अभी तय नहीं हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वार्ताएं जारी हैं, लेकिन किसी तत्काल समझौते की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पाकिस्तान ने जताई उम्मीद
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान, जो वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है, ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में सकारात्मक प्रगति हो सकती है। हालांकि किसी भी अंतिम समझौते को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों और नियंत्रण को बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।
वहीं क्षेत्र में सुरक्षा हालात को लेकर विभिन्न दावे और प्रतिदावे सामने आए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
वैश्विक समुदाय की नजर
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं पर टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल प्रस्तावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और दोनों देशों की ओर से आने वाले आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।
