अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर

कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति बन गई है। दोनों देशों ने समझौते की पुष्टि की है और इसकी औपचारिक हस्ताक्षर प्रक्रिया 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने की संभावना जताई गई है। समझौते के तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का रास्ता साफ हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी संकेत दिया कि समझौते के अंतिम मसौदे पर दोनों पक्ष सहमत हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने दावा किया कि यह समझौता प्रभावी हो चुका है और इसके औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना माना जा रहा है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। समझौते की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी देखी गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार समझौते में समुद्री नाकाबंदी समाप्त करने, कुछ आर्थिक राहत देने और आगे परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अलग वार्ता जारी रखने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। हालांकि कई तकनीकी और राजनीतिक बिंदुओं पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है।

दुनिया के कई देशों ने इस समझौते का स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने इसे मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि समझौते के सफल क्रियान्वयन पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और जमीनी स्तर पर सहयोगी समूहों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। इसके बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बनी यह सहमति हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

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