ईरान सैन्य अभियान पर घमासान: ट्रंप के फैसले का रक्षा मंत्री हेगसेथ ने किया बचाव

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है। इस बीच पीट हेगसेथ ने राष्ट्रपति के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति में प्रशासन को कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई में हेगसेथ ने कहा कि वर्तमान युद्ध विराम (सीजफायर) की स्थिति 60 दिन की कानूनी समय सीमा को प्रभावी रूप से रोक देती है। उनका तर्क है कि ऐसे हालात में वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन लागू नहीं होता।

यह विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि 1973 के इस कानून के तहत राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई के 60 दिन के भीतर अमेरिकी कांग्रेस से अनुमति लेना अनिवार्य होता है या फिर अभियान समाप्त करना पड़ता है।

वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने हेगसेथ की दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून इस तरह की व्याख्या की अनुमति नहीं देता। उन्होंने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताया।

वहीं सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने संकेत दिया कि निकट भविष्य में युद्ध को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव पर मतदान नहीं होगा। अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने चेतावनी दी कि यदि व्हाइट हाउस से स्पष्ट रणनीति नहीं मिलती है, तो वह इस मुद्दे पर प्रस्ताव ला सकती हैं।

मिसौरी के सीनेटर जोश हॉली ने कहा कि प्रशासन के पास कानून के तहत अतिरिक्त 30 दिनों का समय मांगने का विकल्प मौजूद है, जो अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

सुनवाई के दौरान ईरान में एक स्कूल पर कथित हमले का मुद्दा भी उठा, जिसमें 170 से अधिक लोगों की मौत की बात सामने आई। इस पर कई सांसदों ने सैन्य कार्रवाई की जवाबदेही पर सवाल उठाए। क्रिस्टन गिलिब्रैंड और एडम शिफ ने इस अभियान की वैधता और प्रभाव पर सवाल खड़े किए।

हेगसेथ ने जवाब में कहा कि पेंटागन अब एआई आधारित सिस्टम के साथ मानवीय निगरानी का इस्तेमाल कर रहा है और यह अभियान अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है। वहीं ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है और बड़े पैमाने पर हिंसा को रोका गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन को ‘60 दिन की घड़ी’ भी कहा जाता है, जो राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण सुनिश्चित करता है। इस कानून के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के लंबे समय तक युद्ध जारी रखना संभव नहीं है, जिससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।

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