होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव: अमेरिका ने बारूदी सुरंग बिछाने वाले 16 ईरानी सैन्य जलयान नष्ट किए

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भी संघर्ष का अहम केंद्र बनता नजर आ रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने इस क्षेत्र में बारूदी सुरंग बिछाने वाले 16 ईरानी सैन्य जलयानों को नष्ट कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई उस समय हुई जब अमेरिका को आशंका थी कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। यह जलमार्ग दुनिया के लिए तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।

पेंटागन और यूएस सेंट्रल कमांड का दावा

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार को माइन बिछाने वाली 16 ईरानी नावों को नष्ट कर दिया।

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी करने वाला यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सेना ने 10 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी नौसेना के कई जहाजों को नष्ट किया, जिनमें 16 माइन बिछाने वाली नावें शामिल थीं।

इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की योजना बना रहा है, जिससे समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी।

क्या होते हैं माइन बिछाने वाले सैन्य जलयान

माइन बिछाने वाले सैन्य जलयान ऐसे विशेष जहाज या नावें होती हैं जिनका उपयोग समुद्र में बारूदी सुरंगें (Naval Mines) बिछाने के लिए किया जाता है। इन सुरंगों को दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों के रास्ते में लगाया जाता है ताकि उनके गुजरते ही विस्फोट हो सके।

इनका उपयोग अक्सर रणनीतिक जलमार्गों, बंदरगाहों या समुद्री रास्तों को असुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है।

ये जलयान छोटी तेज रफ्तार नावों से लेकर बड़े विशेषीकृत जहाजों तक हो सकते हैं। आधुनिक समय में कई बार इन सुरंगों को स्वचालित नावों या रोबोटिक प्रणाली के माध्यम से भी बिछाया जाता है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा सकता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यदि इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है या समुद्री सुरंगें बिछाई जाती हैं, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ा दी है

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