नेपाल अमेरिका का मजबूत साझेदार, तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ाएंगे: सारा रोजर्स
अमेरिकी विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक कूटनीति संबंधी उप विदेशमंत्री सारा बी. रोजर्स ने नेपाल को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण और मजबूत साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और लोकतांत्रिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। तीन दिवसीय नेपाल यात्रा के समापन से पहले आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिका का दृष्टिकोण स्पष्ट किया।
नेपाल में तकनीकी विकास की अपार संभावनाएं
सारा रोजर्स ने कहा कि नेपाल में नवाचार और आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने नेपाल के प्रौद्योगिकी क्षेत्र की तुलना वैश्विक तकनीकी केंद्रों से करते हुए कहा कि अमेरिका चाहता है कि नेपाल में ऐसा कारोबारी माहौल विकसित हो, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं में बड़े पैमाने पर निवेश हो सके।
उन्होंने कहा कि अमेरिका नेपाल में डिजिटल पहुंच बढ़ाने और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग जारी रखेगा।
स्टारलिंक और डिजिटल कनेक्टिविटी पर टिप्पणी
नेपाल में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के संभावित प्रवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर रोजर्स ने कहा कि अमेरिका नेपाल की संप्रभुता और उसकी आंतरिक प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान करता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अमेरिकी कंपनी का नेपाल में कारोबार करना नेपाल सरकार और संबंधित कंपनियों के निर्णय पर निर्भर करता है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल पहुंच का विस्तार होगा।
एमसीसी परियोजना को बताया महत्वपूर्ण
रोजर्स ने 55 करोड़ डॉलर की मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (MCC) परियोजना को नेपाल की ऊर्जा और आर्थिक संरचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि यह केवल अमेरिकी सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि वास्तविक साझेदारी का उदाहरण है क्योंकि इस परियोजना में नेपाल सरकार भी लगभग 19.7 करोड़ डॉलर का योगदान दे रही है। उनके अनुसार परियोजना का सफल क्रियान्वयन नेपाल के विकास को नई गति देगा।
सहायता नहीं, साझेदारी पर जोर
अमेरिकी सहायता नीति में बदलाव का उल्लेख करते हुए रोजर्स ने बताया कि अब USAID स्वतंत्र एजेंसी के रूप में कार्य नहीं कर रही है और इसकी गतिविधियां अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अंतर्गत संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अब केवल सहायता देने की नीति से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश और साझेदारी आधारित संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर स्पष्ट रुख
इंटरनेट सेंसरशिप और डिजिटल स्वतंत्रता के मुद्दे पर रोजर्स ने कहा कि सरकारों को यह तय नहीं करना चाहिए कि नागरिक क्या सोचें या कौन-सी जानकारी प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी, बाल यौन शोषण और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
रोजर्स के अनुसार गलत सूचना और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर अमेरिका का रुख
नेपाल में अमेरिका, भारत और चीन के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रोजर्स ने कहा कि अमेरिका का मुख्य फोकस नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका नेपाल के साथ आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और निवेश को बढ़ावा देने में रुचि रखता है तथा किसी प्रतिस्पर्धात्मक भू-राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं कर रहा।
द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
नेपाल यात्रा के दौरान रोजर्स ने नेपाल के विदेशमंत्री और सूचना एवं संचार मंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे और आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक साझेदारी भविष्य में और अधिक मजबूत होगी।
