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उज्जैन में युवा धर्म संसद: भागवत बोले- ट्रैफिक नियम मानना और कचरा न करना भी धर्म; 25 राज्यों से पहुंचे 1700 युवा

उज्जैन। उज्जैन में चल रही युवा धर्म संसद में शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल पूजा, परंपराओं या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। व्यक्ति के रोजमर्रा के व्यवहार, जिम्मेदारियों और अनुशासन में भी धर्म दिखाई देना चाहिए।

भागवत ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। सुख-दुख और इच्छाएं स्थायी नहीं हैं, लेकिन धर्म का महत्व हमेशा बना रहता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि किसी इच्छा, डर, लालच या अपनी जान बचाने की स्थिति में भी धर्म के मूल सिद्धांतों को नहीं छोड़ना चाहिए।

धर्म और रिलिजन को एक मानने से पैदा हुआ भ्रम
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में धर्म की अवधारणा को पश्चिमी अर्थ में समझने से कई तरह के भ्रम पैदा हुए। उनके अनुसार, भारत में धर्म का संबंध सिर्फ किसी एक पूजा-पद्धति से नहीं है। पूजा और कर्मकांड धर्म के अभ्यास का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन्हें ही पूरा धर्म मानना सही नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह किसी खेल में दक्षता हासिल करने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी होता है, उसी तरह धार्मिक परंपराएं और अनुशासन भी व्यक्ति के जीवन में अभ्यास की भूमिका निभाते हैं।

सफाई से लेकर ट्रैफिक नियम मानना भी धर्म
भागवत ने धर्म को दैनिक जीवन के व्यवहार से जोड़ते हुए कहा कि सार्वजनिक जगह पर कचरा नहीं फैलाना और यातायात नियमों का पालन करना भी धर्म के दायरे में आता है। उनका कहना था कि अपनी उपासना-पद्धति और परंपराओं का सम्मान करने के साथ दूसरों की आस्था का सम्मान करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर अपनी उपासना-पद्धति थोपना उचित नहीं है। समाज में अलग-अलग मान्यताओं के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना धर्म की व्यापक भावना का हिस्सा है।

पश्चिमी सीमा के पड़ोसी देश का नाम लिए बिना जिक्र
भागवत ने अपने संबोधन में भारत के पश्चिमी पड़ोसी देश का नाम लिए बिना कहा कि वहां से कई बार विवाद और परेशानियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने जरूरत के समय दृढ़ता से जवाब दिया, लेकिन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखल देने की नीति नहीं अपनाई। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारधाराओं की सरकारें सत्ता में रही हैं, फिर भी जरूरत पड़ने पर भारत ने दूसरे देशों की मदद की। उनके मुताबिक भारत की सोच में धर्म का प्रभाव इसकी एक वजह है।

युवाओं का धर्म पर चर्चा करना जरूरी
भागवत ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि युवा धर्म जैसे विषय पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज धर्म को कई बार उम्र के बाद के चरण से जोड़कर देखा जाता है। गीता और रामायण को केवल बुजुर्गों के लिए पढ़ने की चीज मानना सही नहीं है। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन के शुरुआती दौर से ही धर्म के मूल सिद्धांतों को समझना चाहिए और उन्हें व्यवहार में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

अहंकार व्यक्ति को भ्रमित करता है
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने अहंकार में यह मानने लगता है कि हर परिस्थिति उसके नियंत्रण में है और सब कुछ उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, तब गलतफहमियां पैदा होने लगती हैं। धर्म व्यक्ति को अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों को समझने में मदद करता है। भागवत के अनुसार, व्यक्ति जीवन में सुख, सफलता और अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने का रास्ता धर्म और सही आचरण से होकर गुजरता है। उन्होंने धर्म को मोक्ष की दिशा में ले जाने वाला मार्ग भी बताया।

25 राज्यों से पहुंचे करीब 1,700 युवा
उज्जैन के गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक युवा धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है। सेवाज्ञ संस्थानम् के इस आयोजन में देश के करीब 25 राज्यों से लगभग 1,700 छात्र-छात्राएं पहुंचे हैं। कार्यक्रम में करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन सेवाज्ञ संस्थानम् के संरक्षक और सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में हो रहा है। आयोजकों के अनुसार, इससे पहले युवा धर्म संसद काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् में आयोजित की जा चुकी है। अगले वर्ष इसका आयोजन द्वारका में प्रस्तावित है।

धर्म, AI और सूचना संघर्ष पर भी चर्चा
कार्यक्रम के आगामी सत्रों में धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना और विचारों के संघर्ष जैसे विषयों पर संवाद होगा। देशभर से चयनित युवा भी विशेष सत्र में अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम के व्याख्यान सत्र में आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, प्रसिद्ध गीतकार एवं पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, स्मृति अनंतलक्ष्मी और जे. नंद कुमार सहित अन्य वक्ता युवाओं से संवाद करेंगे। आयोजक पक्ष के सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह के अनुसार, इस बार युवा धर्म संसद के लिए जुलाई में पंजीयन शुरू हुआ था, जिसे 31 अगस्त को बंद किया गया। पिछले पांच आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागियों की भागीदारी हो चुकी है।

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