आदिवासी होमस्टे संचालकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू, पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार

देश में जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने और पर्यटन के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम पहल की गई है। India Tourism Development Corporation (आईटीडीसी) और Ministry of Tribal Affairs ने संयुक्त रूप से आदिवासी होमस्टे संचालकों के लिए ‘क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ की शुरुआत की है।
यह कार्यक्रम New Delhi स्थित Hotel Samrat के कौटिल्य हॉल में आयोजित किया गया।
सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देना और आदिवासी क्षेत्रों में आतिथ्य सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
आईटीडीसी के आईएचएम अशोक द्वारा संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में होमस्टे संचालकों को सेवा गुणवत्ता, प्रबंधन कौशल और अतिथि सत्कार के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
पहले चरण में 40 प्रतिभागी शामिल
कार्यक्रम के पहले चरण में Arunachal Pradesh, Sikkim और Gujarat के कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इस प्रशिक्षण से न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए स्वरोजगार और स्थायी आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।
बदलती पर्यटन प्रवृत्ति का लाभ
जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सचिव ने कहा कि आज के पर्यटक भीड़-भाड़ से दूर प्राकृतिक और शांत वातावरण की तलाश करते हैं। ऐसे में होमस्टे मॉडल उन्हें स्थानीय संस्कृति के साथ जुड़ने का वास्तविक अनुभव प्रदान करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में होटल कमरों की कमी के बीच होमस्टे एक प्रभावी समाधान बनकर उभर रहा है।
1 लाख होमस्टे के विजन से प्रेरित पहल
आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक Mugdha Sinha ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi के देशभर में एक लाख होमस्टे स्थापित करने के विजन से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्ष्य 1,500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है, ताकि वे आगे चलकर अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षक की भूमिका निभा सकें।
विशेष मैनुअल का विमोचन
इस अवसर पर “Tribal Homestay – Operation and Development Manual 2026” का भी विमोचन किया गया।
यह मैनुअल आदिवासी होमस्टे के संचालन और विकास के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में काम करेगा। इसे हिंदी और गुजराती सहित कई भाषाओं में तैयार किया गया है, ताकि स्थानीय संचालक इसे आसानी से समझ सकें।
पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश के दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और आर्थिक विकास को भी नई गति देगी।






