तमिलनाडु विधानसभा सत्र: राज्यपाल ने अभिभाषण में अप्रमाणित आरोप और भ्रामक बयानों का आरोप लगाते हुए किया वॉकआउट

तमिलनाडु विधानसभा के वर्ष के पहले सत्र के शुभारंभ के दौरान मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने परंपरागत अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा से वॉकआउट कर दिया।
राज्यपाल ने सदन में कहा कि वे निराश हैं क्योंकि राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई।
अभिभाषण में भ्रामक और अप्रमाणित आरोपों का दावा
राजभवन (लोक भवन) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में कई अप्रमाणित आरोप और भ्रामक बयान शामिल हैं। साथ ही जनता से जुड़े कई गंभीर मुद्दों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
निवेश और एफडीआई के दावों पर सवाल
विज्ञप्ति में राज्य सरकार के 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश दावों को वास्तविकता से दूर बताया गया। कहा गया कि कई एमओयू केवल कागजी हैं और वास्तविक निवेश सीमित है।
इसके अनुसार, चार वर्ष पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर रहा तमिलनाडु अब छठे स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और अपराध के आंकड़े
राज्यपाल के वॉकआउट को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से भी जोड़ा गया। विज्ञप्ति में दावा किया गया कि सरकार इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रही है।
पोक्सो अधिनियम के तहत बलात्कार के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का आरोप लगाया गया।
ड्रग्स, दलित उत्पीड़न और आत्महत्या पर चिंता
राज्यपाल ने युवाओं में नशीले पदार्थों और ड्रग्स के बढ़ते चलन पर भी गहरी चिंता जताई। साथ ही दलितों और दलित महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में तेजी से वृद्धि का उल्लेख किया गया।
विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया कि राज्य में एक वर्ष में लगभग 20,000 आत्महत्याएं हुई हैं, यानी प्रतिदिन औसतन 65 आत्महत्याएं। इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताते हुए तमिलनाडु को ‘भारत की आत्महत्या राजधानी’ तक कहा गया।
शिक्षा, पंचायत और मंदिर प्रशासन पर आरोप
राज्यपाल ने शिक्षा के स्तर में गिरावट, शैक्षणिक संस्थानों में कुप्रबंधन, और स्थानीय स्वशासन की उपेक्षा का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि हजारों ग्राम पंचायतें वर्षों से चुनाव न होने के कारण निष्क्रिय हैं, जिससे करोड़ों लोग जमीनी लोकतंत्र से वंचित हैं।
इसके अलावा राज्य के हजारों मंदिरों में न्यासी मंडल न होने और उनके सीधे सरकारी नियंत्रण में होने का मुद्दा भी उठाया गया। प्राचीन मंदिरों के संरक्षण से जुड़े मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों के पांच वर्ष बाद भी लागू न होने का आरोप लगाया गया।
एमएसएमई सेक्टर पर बढ़ता दबाव
विज्ञप्ति में कहा गया कि एमएसएमई सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागतों के दबाव में है, जिसके कारण तमिलनाडु के उद्यमी अपने उद्योगों को अन्य राज्यों में स्थानांतरित करने को मजबूर हो रहे हैं।
इन्हीं सभी कारणों को राज्यपाल आर.एन. रवि के विधानसभा से वॉकआउट का आधार बताया गया है।





