स्विगी को बड़ा झटका! कंपनी नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को नहीं मिली जरूरी शेयरधारक मंजूरी

स्विगी को बड़ा झटका! कंपनी नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को नहीं मिली जरूरी शेयरधारक मंजूरी

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी (Swiggy) को बड़ा झटका लगा है। कंपनी को अपने कंपनी गठन के कायदे-कानून (Articles of Association – AOA) में बदलाव के प्रस्ताव के लिए जरूरी शेयरधारक मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बदलाव के जरिए स्विगी खुद को भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित कंपनी (IOCC) के रूप में योग्य बनाना चाहती थी।

72.35% समर्थन मिला, लेकिन मंजूरी नहीं

कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, AOA संशोधन प्रस्ताव को 72.35 फीसदी शेयरधारकों का समर्थन मिला, लेकिन विशेष प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक सीमा से यह 2.65 फीसदी कम रह गया।

इस मंजूरी के लिए कंपनी ने डाक मतपत्र (Postal Ballot) के जरिए ई-वोटिंग प्रक्रिया अपनाई थी।

क्या था प्रस्ताव?

स्विगी ने दो प्रमुख प्रस्तावों पर शेयरधारकों से मंजूरी मांगी थी:

  • कंपनी के AOA में संशोधन
  • रेनन डी कास्त्रो आल्वेस पिंटो को गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र नामित निदेशक नियुक्त करना

हालांकि, दूसरे प्रस्ताव को 98.98 फीसदी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई।

स्विगी ने क्या कहा?

स्विगी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इस परिणाम को स्वीकार करती है और 72.35 फीसदी समर्थन को सकारात्मक संकेत मानती है। उन्होंने कहा कि कंपनी शेयरधारकों के साथ संवाद जारी रखेगी और सकारात्मक समाधान की दिशा में काम करेगी।

क्यों जरूरी था AOA में बदलाव?

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों के अनुसार, किसी कंपनी को भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित कंपनी (IOCC) तभी माना जाता है, जब उसका नियंत्रण भारतीय नागरिकों या पात्र भारतीय संस्थाओं के हाथ में हो।

इसके लिए निदेशक मंडल की संरचना और नामांकन व्यवस्था में भारतीय नियंत्रण सुनिश्चित करना जरूरी होता है। ऐसे में AOA में बदलाव स्विगी के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा था।

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