पराली जलाने पर रोक के उपायों पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा से स्थिति रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया है कि वे पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। न्यायालय ने यह निर्देश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण संकट को देखते हुए दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले पर सुनवाई अगले सप्ताह जारी रहेगी।
सर्वोच्च न्यायालय इस समय 1985 में दायर वायु प्रदूषण संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिससे फसल अवशेष जलाने का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-III) लागू कर दिया है, लेकिन मौजूदा वायु गुणवत्ता स्थिति को देखते हुए GRAP-IV लागू करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। वकील ने यह भी कहा कि कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के पार पहुंच गया है और सुप्रीम कोर्ट परिसर सहित कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी हैं।
इससे पहले सीएक्यूएम ने हरियाणा के फतेहाबाद जिले के उपायुक्त को नोटिस जारी किया था, क्योंकि वहां पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। 1 से 9 नवंबर के बीच 48 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 28 घटनाएं केवल दो दिनों (8 और 9 नवंबर) में हुईं। आयोग ने कहा कि यह प्रवर्तन आदेशों के बावजूद कार्रवाई की विफलता को दर्शाता है और राज्य सरकार की कार्ययोजना के कमजोर क्रियान्वयन की ओर इशारा करता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख केंद्र और राज्यों पर पराली प्रबंधन के प्रभावी कार्यान्वयन और एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ा रहा है।






