लखनऊ बनी उत्तर प्रदेश की पहली जीरो फ्रेश वेस्ट डंप सिटी, शत-प्रतिशत कचरे का वैज्ञानिक निपटान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ राज्य का पहला ऐसा शहर बन गया है, जिसे जीरो फ्रेश वेस्ट डंप सिटी का दर्जा मिला है। इसका अर्थ है कि शहर में रोजाना निकलने वाले समस्त कचरे का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा रहा है और किसी भी प्रकार का ताजा कचरा खुले में डंप नहीं किया जा रहा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, लखनऊ नगर निगम ने शिवारि क्षेत्र में तीसरे ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की शुरुआत की है। इस नए संयंत्र की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इसके साथ ही शहर में अब कुल तीन कचरा प्रबंधन संयंत्र संचालित हो रहे हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 2100 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गई है।
लखनऊ शहर में प्रतिदिन लगभग 2000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसे अब पूरी तरह से वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है। नगर निगम के अनुसार, कचरे को दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है— जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत)।
जैविक कचरे से खाद और बायोगैस का निर्माण किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है या फिर सीमेंट और पेपर उद्योगों में उपयोग होने वाले ईंधन (आरडीएफ) में बदला जाता है।
शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता 96.53 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक नागरिक अपने घरों पर ही कचरे का पृथक्करण कर रहे हैं। यह स्वच्छता और जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नगर निगम ने बताया कि शहर में पहले से जमा लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से अब तक 12.86 लाख मीट्रिक टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा चुका है। इससे खाद, मिट्टी, आरडीएफ और निर्माण सामग्री तैयार की गई है, जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जा रहा है।
इस व्यापक कचरा प्रबंधन अभियान के चलते करीब 25 एकड़ भूमि भी मुक्त कराई गई है, जहां अब आधुनिक कचरा प्रबंधन केंद्र विकसित किया गया है।
आगे की योजना के तहत शिवारि में एक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता 15 मेगावॉट होगी, जो प्रतिदिन 1000 से 1200 मीट्रिक टन कचरे से बने ईंधन का उपयोग कर बिजली उत्पादन करेगा।
लखनऊ की यह उपलब्धि न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के शहरी निकायों के लिए स्वच्छता, सतत विकास और स्मार्ट सिटी मॉडल के रूप में एक प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।






