आने वाले महीनों में क्यों बढ़ सकती है खाद्य महंगाई? ;ऊर्जा, धातु और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा, धातु और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध की तुलना में खाद्य पदार्थों की कीमतों में अभी तक उतनी तेज बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि “सुपर” एल नीनो की आशंका के चलते आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।
11 जून को अमेरिका की नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने एल नीनो की स्थिति विकसित होने की पुष्टि की। एजेंसी ने अक्टूबर से जनवरी के बीच इसके “बहुत मजबूत” (Very Strong) रूप लेने की 62-63 प्रतिशत संभावना जताई है।
क्या है एल नीनो?
एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में, विशेष रूप से पेरू और इक्वाडोर के तटों के पास समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। इसका असर वैश्विक मौसम पर पड़ता है। भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में यह आमतौर पर शुष्क मौसम और कम बारिश से जुड़ा होता है, जबकि पश्चिमी लैटिन अमेरिका, अमेरिका के खाड़ी तटीय इलाकों और कैरेबियाई क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ ला सकता है।
वर्तमान में पूर्वी-मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र का समुद्री सतह तापमान 30 वर्षों के औसत से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। 0.5 से 1 डिग्री तक की बढ़ोतरी को कमजोर (Weak) एल नीनो माना जाता है। 1 से 1.5 डिग्री के बीच इसे मध्यम (Moderate), 1.5 से 2 डिग्री के बीच मजबूत (Strong) और 2 डिग्री से अधिक होने पर बहुत मजबूत (Very Strong) एल नीनो कहा जाता है।
अभी खाद्य कीमतों पर नहीं पड़ा असर
2026 में एल नीनो की वापसी हुई है। इससे पहले 2023-24 में भी एक मजबूत एल नीनो जून 2023 से अप्रैल 2024 तक सक्रिय रहा था।
इसी दौरान अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी बड़ा झटका लगा है। 28 फरवरी से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से उर्वरकों की कीमतों में तेज उछाल आया है। अप्रैल-मई में भारत ने यूरिया और डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का आयात क्रमशः 935-959 डॉलर और 930-935 डॉलर प्रति टन की दर से किया, जबकि एक साल पहले यही कीमतें 410-420 डॉलर और 700-725 डॉलर प्रति टन थीं। इसके बावजूद अब तक एल नीनो और ईरान संकट का वैश्विक खाद्य कीमतों पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला है।
गेहूं, मक्का और चावल की कीमतें स्थिर
अर्जेंटीना से निर्यात होने वाले गेहूं की कीमत 237 डॉलर प्रति टन है, जो पिछले वर्ष के 233 डॉलर प्रति टन से केवल थोड़ी अधिक है। वहीं रूस और यूरोपीय संघ के गेहूं के निर्यात मूल्य लगभग स्थिर बने हुए हैं। अमेरिका और ब्राजील के मक्का निर्यात मूल्य 205-208 डॉलर प्रति टन के बीच हैं, जो पिछले वर्ष के 200-201 डॉलर प्रति टन की तुलना में मामूली बढ़ोतरी दर्शाते हैं। भारत और पाकिस्तान से निर्यात होने वाले गैर-बासमती चावल की कीमतें वर्तमान में 340-380 डॉलर प्रति टन हैं, जो एक वर्ष पहले के 380-395 डॉलर प्रति टन के स्तर से कम हैं। हालांकि अभी खाद्य कीमतें नियंत्रण में हैं, लेकिन यदि एल नीनो और अधिक मजबूत होता है तथा प्रमुख कृषि क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होता है, तो आने वाले महीनों में वैश्विक खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
