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सीधी सांसद के बेटे-बहू चला रहे निर्माणाधीन बिल्डिंग में नर्सिंग कॉलेज: 120 सीटों की मान्यता मिली; NSUI ने कहा- अधिकारी कर रहे फर्जीवाड़ा

सीधी। कुसमी तहसील के भादौरा के आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज में अधिकारियों ने निर्माणाधीन बिल्डिंग को ही मान्यता दे दी।

भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा ने इस निर्माणाधीन बिल्डिंग में नर्सिंग कॉलेज शुरू किया है।

इस कॉलेज की न तो अच्छी बिल्डिंग है, ना बेसिक सुविधा और लैब की फेसिलिटी भी नहीं है। इसके बाद भी आयुष्मान नर्सिंग कॉलेज को 120 सीटों की मान्यता मिली है।

मामले को लेकर जब सांसद के बेटे अनूप मिश्रा से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं अभी मरीजों के बीच में हूं  कॉल बैक करता हूं। वहीं सासंद ने फोन नहीं उठाया।

घोटाले से परेशान स्टूडेंट्स 
प्रदेश में पहले से घोटालों की वजह से हजारों नर्सिंग स्टूडेंट परेशान है। घोटाले को लेकर दो बार सीबीआई जांच हो चुकी हैं।  हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों को भी सीबीआई जांच करवाने को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि जांच करवाना अनिवार्य हैं।

120 सीटों की मान्यता मिली
इन सब परेशानियों के बीच सीधी के इस आधे अधूरे कॉलेज को मान्यता मिलने से स्टूडेंटस की चिंता और बढ़ गई है। इस आधे-अधूरे कॉलेज को 120 सीटों की मान्यता मिली है। भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा ने निर्माणाधीन बिल्डिंग में नर्सिंग कॉलेज खोला है।

CBI जांच की मांग 
मामले की जानकारी मिलते ही NSUI ने CBI से की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। NSUI ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए CBI भोपाल के संयुक्त निदेशक, मुख्यमंत्री और विभाग के तमाम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है।

सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति से हो रहा संचालन 
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि कॉलेज के दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉलेज संचालन अनुप मिश्रा , बीना मिश्रा, वैष्णवी मिश्रा, शरद पाठक, राजेश सिंह चौहान रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी ने सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा हैं।

कॉलेज की ओनर्शिप की जांच हो
रवि परमार ने बताया कि NSUI ने CBI से मांग की है कि कॉलेज की ओनर्शिप, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता कैसे?
NSUI की शिकायत के अनुसार कॉलेज ने B.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया था। परमार का कहना है कि जिस समय कॉलेज की मान्यता की प्रक्रिया हुई, उस समय कॉलेज बन रहा था और अभी भी बन ही रहा हैं। इसके बावजूद निरीक्षण दल ने कॉलेज को मान्यता दे दी।

फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी फर्जी कहा 
रवि परमार ने सवाल उठाया कि अगर  निरीक्षण के समय बिल्डिंग, लैब और अन्य संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य पाया? रवि ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी फर्जी बताया हैं।

 

जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच
उपाध्यक्ष ने CBI से मांग की गई है कि हर प्रमाण-पत्र को संबंधित अस्पताल, संस्था या नियोक्ता से सीधे सत्यापित कराया जाए। अगर कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है तो उसके आधार पर मान्यता प्राप्त करने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं की जांच की जाएं 
NSUI ने कहा कि जांच केवल कॉलेज संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों, निरीक्षण दल के सदस्यों और मान्यता प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जाएं है। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान कॉलेज में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध थीं और निरीक्षण रिपोर्ट में इसके लिए क्या लिखा गया यह भी जांच हो।

 

 

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ 
NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि किसी ऐसे कॉले में स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाता है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।

लाखों खर्च करके पढ़ते है नर्सिंग 
अक्षय तोमर ने कहा कि विद्यार्थी लाखों खर्च करके नर्सिंग पढ़ते हैं। ऐसे में यदि बाद में कॉलेज की मान्यता, परीक्षा, डिग्री या पंजीयन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो विद्यार्थियों के भविष्य को खतरा होगा।

 

विद्यार्थियों के भविष्य के साथ समझौता नहीं होगा 
NSUI ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने CBI से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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