शिमला में पांच साल में 391 ड्रग तस्कर गिरफ्तार, सिर्फ एक चौथाई को मिली सजा

नशे के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद ड्रग्स तस्करी के मामलों में शिमला जिले में सजा की दर बेहद कम रही है। पिछले पाँच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि शिमला पुलिस ने भले ही ड्रग गिरोहों का पर्दाफाश किया और बड़े नशा तस्करों को गिरफ्तार किया, लेकिन अदालतों में इन मामलों में दोषसिद्धि दर केवल 26 प्रतिशत रही।
📊 पिछले पांच वर्षों के आंकड़े
2021: 20 मामलों में 5 दोषसिद्धि
2022: 29 मामलों में 9 दोषसिद्धि
2023: 91 मामलों में 21 दोषसिद्धि
2024: 107 मामलों में 25 दोषसिद्धि
2025: 144 मामलों में 38 दोषसिद्धि
कुल मिलाकर 391 एनडीपीएस मामलों में केवल 98 में ही दोषसिद्धि हुई, जबकि 293 आरोपी दोषमुक्त हो गए।
⚖️ कार्यशाला में खुलासे
शिमला में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में यह तथ्य सामने आया। इस कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी-एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत दर्ज मामलों और उनकी दोषसिद्धि दर पर चर्चा की गई।
जिला न्यायवादी सुधीर शर्मा ने बताया कि पॉक्सो एक्ट में 138 मामलों में से सिर्फ 49 मामलों में दोषसिद्धि हुई, यानी सजा की दर 35 प्रतिशत रही।
👮♂️ पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि जब पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिलता है तो यह पूरी कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने कहा कि एनडीपीएस, एससी-एसटी और पॉक्सो जैसे गंभीर कानूनों में दोषमुक्ति की ऊँची दर पुलिस के लिए चुनौती है। उन्होंने जांच अधिकारियों से कहा कि निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित जांच होनी चाहिए ताकि अदालत में मामले मजबूती से पेश किए जा सकें।






