मप्र के शहडोल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मृत्युदंड

📰 मप्र के शहडोल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मृत्युदंड
शहडोल, 16 जनवरी (हि.स.)।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में बुढ़ार स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को “निर्भया जैसा वीभत्स मामला” बताते हुए मुख्य आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह अपराध मानवता को शर्मसार करने वाला है और ऐसे मामलों में माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा—
“तीन वर्ष की वह मासूम जो बोल भी नहीं सकती थी, उसने कितना दर्द सहा होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला है और ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”
🕯️ घटना का पूरा विवरण
यह मामला खैरहा थाना क्षेत्र का है।
1 मार्च 2023 की रात बच्ची की मां मोहल्ले में एक शादी समारोह में गई थी। उसने अपनी तीन साल की बेटी शिवांगनी को घर में बिस्तर पर सुला दिया था। उस समय घर में पति का दोस्त आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर मौजूद था।
रात करीब 11 बजे जब मां लौटी तो बच्ची जमीन पर बेहोश हालत में पड़ी मिली। उसके चेहरे, गाल और गले पर गहरे चोट के निशान थे। आरोपी ने शराब के नशे में बच्ची को थप्पड़ मारने की बात कही और पुलिस में शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।
🏥 इलाज के दौरान मौत, पोस्टमॉर्टम से खुला राज
डर के कारण मां ने शुरू में सही बयान नहीं दिया। बच्ची की हालत बिगड़ने पर उसे पहले बुढ़ार अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर किया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।
7 मार्च 2023 को इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया था। इसके बाद पुलिस ने हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाईं। डीएनए टेस्ट से आरोपी की हैवानियत प्रमाणित हुई।
🔬 फॉरेंसिक साक्ष्य बने अहम आधार
एडीपीओ संतोष कुमार पाटले के अनुसार, इस केस में मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक एक्सपर्ट प्रोफेसर पवन वानखेड़े की गवाही निर्णायक रही।
उन्होंने अदालत में स्पष्ट किया कि बच्ची के जननांगों में पुरुष लिंग से गंभीर चोट के निशान थे, जिससे दुष्कर्म की पुष्टि हुई। अदालत ने इस बयान को अत्यंत गंभीरता से लिया।
⚖️ अदालत का अंतिम फैसला
भानू उर्फ रामनारायण ढीमर
धारा 302 भादवि: आजीवन कारावास
धारा 201 भादवि: 3 वर्ष सश्रम कारावास
पॉक्सो एक्ट धारा 5(एम)/6: फांसी की सजा
पिंकी ढीमर (पत्नी) और राजकुमार बर्मन
सबूत छिपाने के अपराध में 4-4 वर्ष का सश्रम कारावास
📌 निष्कर्ष
यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में
मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता पर कोर्ट का कड़ा रुख
पॉक्सो कानून के तहत मृत्युदंड का ऐतिहासिक फैसला






