SC-ST Act: मुआवजे की अगली किस्त से पहले देना होगा शपथपत्र, बयान से मुकरने पर 30 दिन में लौटानी होगी पूरी राशि – जबलपुर हाईकोर्ट

एक युवती ने जबलपुर हाईकोर्ट में SC – ST एक्ट के तहत याचिका दायर की है, जिसमें हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि SC – ST एक्ट के तहत मुआवजे की अगली किस्त पाने की अगली किश्त पाने से पीड़िता को शपथपत्र देना होगा। जस्टिस विशाल मिश्रा ने आदेश जारी करते हुए कहा कि मुकरने पर 30 दिन पूरी राशि वापस लौटना होगी ।
इस केस में हुई हाईकोर्ट की सुनवाई
युवती ने मांग की थी कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद देय आर्थिक सहयता की किश्त जारी की जाए। राज्य सरकार ने सुनवाई की दौरान अदालत में अपनी बात रखी । सरकार की ओर से कहा गया कि कई मामलों में पीड़िता पक्ष मुआवजे लेने के बाद ट्रायल के समय अपने बयान बदल देते है । इससे सरकारी मदद का उद्येश्य असफल हो जाता है ।
हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने आदेश दिया कि संबंधित अधिकारी पीड़िता से हलफनामा लें। उसमें लिखा होगा कि वह मुकदमे के दौरान आरोपी से समझौता नहीं करेगी और न ही अपनी गवाहों से पीछे पीछे हटेगी। इस दौरान यदि ट्रायल के समय वह आरोपों से मुकरती है तो फैसले के 30 दिन के भीतर पूरी सहायता राशि लौटना होगी ।
आगे की कार्रवाई के सकता है ट्रायल कोर्ट
यदि पीड़िता मुकरती है तो कोर्ट उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगा । यानि केवल राशि लेना नहीं, अन्य कार्रवाई भी हो सकती है ।
यह है SC- ST एक्ट में मुआवजे का रंग रूप
अनुसूचित जाति और अनुचित जनजाति से जुड़े अत्याचार के मामले में मध्यप्रदेश में 85,000 से 8,85,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि राज्य और केंद्र सरकार 50-50 अनुपात में देती हैं। मामला दर्ज होते ही 25%, चार्जशीट पर 50% और दोष सिद्ध होने पर 25% मिलती है।