कॉमेडी से लेकर गंभीर किरदारों तक छाप छोड़ने वाले सलीम कुमार का निधन
मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता सलीम कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। हर कॉमेडी से लेकर गंभीर किरदारों तक अपनी अलग छाप छोड़ने वाले सलीम को 2010 में ‘अदमिंते मकान अबू’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारभी मिला था। चार बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से सम्मानित सलीम कुमार को मलयालम सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से गिना जाता था। 56 साल की उम्र में ही दुनिया से उनका जाना मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़े झटके जैसा है। एक्टर की तबीयत कुछ समय से ठीक नहीं चल रही थी। शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कोच्चि के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें वेंटिलेटर के स्पोर्ट पर रखा गया था।
300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया
सलीम कुमार मलयालम सिनेमा में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उन्होंने मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों में अभिनय किया। साथ ही कुछ तमिल और ओडिया फिल्मों में भी नजर आए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉमिक रोल से की और अपनी कॉमिक टाइमिंग, एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी के लिए जाने गए। बाद में उन्होंने खुद को कैरेक्टर एक्टर के तौर पर स्थापित किया।
केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित हुए
सलीम कुमार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल राज्य फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला। इसके अलावा ‘अचनुरंगथा वीडु’ (2005) के लिए द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ‘अयालुम न्जानुम थम्मिल’ (2013) के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता और ‘करुथा जूथन’ (2017) के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी का केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी मिला।
सलीम कुमार के परिवार में उनकी पत्नी सुनीता, दो बेटे चंदू सलीम कुमार और आरोमल सलीम कुमार हैं। चंदू सलीम कुमार भी एक्टर हैं।
