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वैश्विक संकटों के बीच BRICS की एकजुटता जरूरी: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को ब्रिक्स (BRICS) देशों से वैश्विक संघर्षों, आर्थिक अस्थिरता और व्यापारिक व्यवधानों से निपटने के लिए “व्यावहारिक तालमेल” विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, ऐसे समय में BRICS देशों की एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण है।

दो दिवसीय BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। संघर्षों, जलवायु परिवर्तन और कोविड महामारी के प्रभाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का असर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर पड़ा है। आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, बढ़ती महंगाई और सीमित आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं ने विकासशील देशों की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं। ऐसे में भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) और विविधीकृत बाजारों को बढ़ावा देना जरूरी है।

विदेश मंत्री ने कहा कि केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि BRICS देशों को समन्वित और प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि वैश्विक संकटों के असर को कम किया जा सके। उन्होंने संवाद और कूटनीति को मौजूदा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

पश्चिम एशिया और गाजा संकट पर चिंता
जयशंकर ने गाजा संघर्ष के गंभीर मानवीय परिणामों पर चिंता जताते हुए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और शांतिपूर्ण समाधान के लिए विश्वसनीय प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने दोहराया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है। साथ ही लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की स्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की।

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की वकालत
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत वैश्विक सहयोग की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि “आतंकवाद के किसी भी रूप को उचित नहीं ठहराया जा सकता”। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए “जीरो टॉलरेंस” को वैश्विक मानक बनाने की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र सुधार पर जोर
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की कमजोर होती स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार की आवश्यकता दोहराई।

उन्होंने कहा, “हमारे समय का स्पष्ट संदेश है कि सहयोग अनिवार्य है, संवाद आवश्यक है और सुधार में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।”

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