राज्यसभा में शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल संप्रभुता पर बहस, सरकार से ठोस कदम की मांग

राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान शिक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और डिजिटल संप्रभुता जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सदस्यों ने सरकार से इन क्षेत्रों में ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की।
शिक्षा प्रणाली में तनाव पर चिंता
भाजपा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली में अंकों की होड़ के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। परिवार और समाज के दबाव से बच्चे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि
- प्रत्येक 100 छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सक नियुक्त किया जाए
- शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाए
स्वास्थ्य और पोषण पर उठे सवाल
कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने देश में बढ़ते मधुमेह और मोटापे के मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर रंग-आधारित चेतावनी प्रणाली लागू करने की मांग की, ताकि उपभोक्ताओं को स्पष्ट पोषण जानकारी मिल सके।
डिजिटल संप्रभुता पर जोर
कांग्रेस के नीरज डांगी ने डिजिटल सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए भारत में स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपने सर्च इंजन बनाकर डिजिटल संप्रभुता को मजबूत किया है, जबकि भारत का डेटा बड़े पैमाने पर विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भर है।
गोपनीयता और सुरक्षा का मुद्दा
सदस्यों ने चेतावनी दी कि विदेशी प्लेटफॉर्म पर डेटा निर्भरता गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
संसद में उठे ये मुद्दे देश के भविष्य से जुड़े अहम विषयों को दर्शाते हैं, जिन पर जल्द ठोस नीतिगत फैसले लेने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।






