प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर राष्ट्र की शक्ति और समृद्धि की कामना की

Narendra Modi ने पवित्र पृथ्वी को राष्ट्र की शक्ति का स्रोत बताते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया और देश की ऊर्जा, बल तथा समृद्धि की कामना की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा—
“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”
प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से पृथ्वी की महिमा का वर्णन करते हुए राष्ट्र के लिए शक्ति और ऊर्जा की कामना की।
इस सुभाषित का भावार्थ है कि पृथ्वी, जिसके भीतर समुद्रों का जल समाहित है और जो चारों ओर से जल से घिरी हुई है, जिसे विद्वान अपने ज्ञान से समझते आए हैं और जिसका हृदय व्यापक आकाश में शाश्वत सत्य से आच्छादित है, वही पवित्र पृथ्वी हमारे श्रेष्ठ राष्ट्र को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करे।
प्रधानमंत्री के इस संदेश को राष्ट्र की समृद्धि, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना के रूप में देखा जा रहा है।






