प्रधानमंत्री मोदी ने आंतरिक ज्ञान को बताया राष्ट्र प्रगति का मूल आधार

नरेन्द्र मोदी ने आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार होता है। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा कर यह संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत हमेशा से यह सिखाती रही है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही उपयोग ही समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाता है।
उन्होंने संस्कृत में यह सुभाषित साझा किया—
“अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।
तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥”
इसका अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो ज्ञान हमारे भीतर निहित है और जो बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस संसार का वास्तविक सार है। महान और विद्वान व्यक्ति इसी आंतरिक ज्ञान को सर्वोच्च मानते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा इसी मूल्य-आधारित सोच को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर के ज्ञान को पहचानें और उसे समाज व देश की प्रगति के लिए उपयोग में लाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और यही मूल्य देश को सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।






