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प्रधानमंत्री मोदी ने आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान मंदिर का किया उद्घाटन, समाज शक्ति, युवा और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर

Narendra Modi ने रविवार को बेंगलुरु के कनकपुरा रोड स्थित Art of Living Foundation आश्रम में नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न सामाजिक और आध्यात्मिक उपक्रमों का शुभारंभ भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने आध्यात्मिकता, समाज की शक्ति, युवा नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी विकास जैसे विषयों पर विस्तार से विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का वास्तविक आधार समाज की शक्ति होती है और केवल सरकारें देश को नहीं बदल सकतीं। उन्होंने कहा कि जब समाज सक्रिय भागीदारी करता है, तभी राष्ट्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। मोदी ने कहा कि आश्रम में बच्चों द्वारा वैदिक मंत्रों से स्वागत, गुरुदेव का आशीर्वाद और सेवा परंपरा का अनुभव उनके लिए विशेष और यादगार रहा।

बेंगलुरु की पहचान पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शहर केवल तकनीक और सॉफ्टवेयर के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी दुनिया में पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक और आध्यात्मिकता का संतुलन ही बेंगलुरु की सबसे बड़ी विशेषता है। प्रधानमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग की सेवा गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि जब संकल्प स्पष्ट हो और सेवा भाव से कार्य किया जाए तो सकारात्मक परिणाम स्वतः सामने आते हैं।

युवा शक्ति और नवाचार पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति ने देश को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाया है, जबकि देश का नवाचार तंत्र दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय युवा अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेज रहे हैं, जो नई पीढ़ी की क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

पर्यावरण संरक्षण और कृषि पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रसायनों ने धरती और खेती दोनों को नुकसान पहुंचाया है और धरती मां को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण में समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ योजना का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी बल दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘मिशन लाइफ’ को जिम्मेदार और जागरूक जीवनशैली का आंदोलन बताते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना ही भविष्य का रास्ता है। उन्होंने कहा कि उनके दृष्टिकोण से मिशन लाइफ, आर्ट ऑफ लिविंग की जीवन शैली का प्रत्यक्ष स्वरूप है।

कार्यक्रम में Sri Sri Ravi Shankar सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने श्री गणेश के दर्शन करने के बाद ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया और आश्रम के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, स्वयंसेवक और अतिथि मौजूद रहे, जिससे आश्रम परिसर आध्यात्मिक उत्साह और ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

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