ऑपरेशन सिंदूर के एक साल: डिफेंस शेयरों में जबरदस्त उछाल, ड्रोन और AI आधारित रक्षा तकनीकों पर बढ़ा फोकस

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के एक साल बाद भारत के रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस दौरान देश में रक्षा आधुनिकीकरण, घरेलू रक्षा खरीद और नई युद्ध तकनीकों पर सरकार का विशेष फोकस रहा, जिसका सीधा असर डिफेंस सेक्टर की कंपनियों और उनके शेयरों पर दिखाई दिया।
पिछले 12 महीनों में निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स में करीब 30 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इस दौरान कई डिफेंस कंपनियों के शेयरों में शानदार उछाल देखने को मिला।
सबसे ज्यादा तेजी MTAR Technologies में रही, जिसके शेयर करीब 350 प्रतिशत तक चढ़ गए। वहीं Axiscades Technologies में 180 प्रतिशत और Apollo Micro Systems में 160 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
इसके अलावा Dynamatic Technologies, Data Patterns और Bharat Forge जैसे शेयरों में भी 70 से 90 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) में Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd. सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी रही। वहीं Mazagon Dock Shipbuilders Ltd. और Bharat Dynamics Ltd. अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयर रहे।
Bharat Electronics Ltd. (BEL), जो अब निफ्टी 50 का हिस्सा बन चुकी है, पिछले एक साल में करीब 40 प्रतिशत चढ़ी है।
इस वर्ष के केंद्रीय बजट में भी रक्षा क्षेत्र पर बड़ा जोर दिया गया। रक्षा बजट में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे लगभग ₹8 लाख करोड़ तक पहुंचाया गया। वहीं पूंजीगत व्यय (Capex) बजट में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, जिसका बड़ा हिस्सा घरेलू रक्षा खरीद के लिए निर्धारित किया गया।
सरकारी ऑर्डर्स का फायदा कंपनियों की ऑर्डर बुक में साफ नजर आ रहा है।
Hindustan Aeronautics Limited (HAL) की ऑर्डर बुक करीब ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। वहीं BEL की ऑर्डर बुक करीब ₹80,000 करोड़ है। तीनों प्रमुख PSU शिपबिल्डर्स की संयुक्त ऑर्डर बुक भी लगभग ₹80,000 करोड़ बताई जा रही है।
आने वाले समय में कई बड़े रक्षा ऑर्डर्स पर नजर बनी हुई है, जिनमें P75-I पनडुब्बी प्रोजेक्ट, नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स, फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स और QRSAM (Quick Reaction Surface to Air Missile) जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।
पूर्व रक्षा सचिव Giridhar Aramane ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा कि भविष्य का युद्धक्षेत्र तेजी से एयरोस्पेस तकनीकों की ओर बढ़ रहा है, जिसमें ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम, AI आधारित प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस व्हीकल्स अहम भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में रक्षा खर्च का बड़ा हिस्सा इन्हीं आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ सकता है।
वहीं Zen Technologies के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Ashok Atluri ने कहा कि पारंपरिक मिसाइल आधारित रक्षा प्रणाली अब बेहद महंगी साबित हो रही है, जबकि कम लागत वाले ड्रोन युद्ध की रणनीति बदल रहे हैं।
कंपनी ने हाल ही में इंटरसेप्टर ड्रोन, लेजर आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्वायत्त एंटी-ड्रोन प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं, जो भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं।






