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ओह माय डॉग के निर्माण को लेकर अमित राय ने रखी अपनी राय, कहा हम भूल गए है कि फिल्म असल में कहानी, किरदारों, परिस्थिति और इंसानी भावनाओं के बारे में

ओएमजी और ओएमजी 2 के डायरेक्टर अमित राय अब अपनी अगली फिल्म ओह माय डॉग के साथ तैयार है। आखिर उन्होंने इस फिल्म पर काम करना क्यों चुना। इसकी वजह उन्होंने खुद मीडिया को बताई है।

स्टार, स्टूडियो और बजट…सब कहानी के अधीन

ओएमजी 2 की सफलता के बाद अमित आसानी से एक कमर्शियल फिल्म बना सकते थे लेकिन उन्होंने ओह माय डॉग पर काम करना शुरू कर दिया। यह फिल्म एक 12 साल के लड़के और एक इंडी डॉग की कहानी है। इस बारे में अमित राय कहते हैं, ‘किसी कहानी को कहने की इच्छा ही आगे बढ़ने की वजह होती है, चाहे फिल्म बड़े बजट की हो या छोटे बजट की। स्टार, स्टूडियो और बजट…सब कहानी के अधीन होते हैं, न कि कहानी उनके अधीन। अमित को फिल्म की कहानी ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया और उन्होंने तुरंत इसपर काम शुरू कर दिया।

मेरे पास एक कुत्ता है, जो मेरे बेटे जैसा

अमित राय का कहना हैं कि ‘ओएमजी 2’ के बाद वे एक बड़ी कमर्शियल फिल्म बना सकते थे। उन्होंने कहा, ‘मैंने यह कहानी इसलिए चुनी, क्योंकि यह मेरे पास स्वाभाविक रूप से आई। मेरे पास एक कुत्ता है, जो मेरे बेटे जैसा है और उसके प्यार और वफादारी ने मुझे हैरान कर दिया है। उसी ने मुझे इस कहानी के लिए प्रेरित किया’।

हम फिल्में नहीं बना रहे हैं, बल्कि प्रोजेक्ट्स बढ़ा रहे हैं

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए अमित राय ने कहा, ‘हमारी इंडस्ट्री के साथ प्रॉब्लम यह है कि हम फिल्में नहीं बना रहे हैं, बल्कि प्रोजेक्ट्स बढ़ा रहे हैं। जिस तरह से हम स्टोरीटेलिंग करते हैं, उसमें कुछ गड़बड़ है। यहाँ कैरेक्टर ग्राफ के पहले बिजनेस ग्राफ की बात की जाती है। सीन कंस्ट्रक्शन से ज्यादा पीपीटी, पाई चार्ट और टेरिटरी पर फोकस है। यही कारण है कि फिल्म में स्टोरीटेलिंग पीछे छूट गई है।

यहाँ रैट रेस चल रही है

अमित का कहना है कि ‘हम में से कई लोग भूल गए हैं कि फिल्म असल में कहानी, किरदारों, परिस्थिति और इंसानी भावनाओं के बारे में है। फिल्म का बिजनेस ही कहानी की वजह से है। कहानी, बिजनेस की वजह से नहीं। फैसले लेने वालों के छोटी सोच को देखते हुए महत्वपूर्ण स्टोरीटेलिंग की गुंजाइश कम हो गई है। यहां एक रैट रेस है। कोई भी यूनिक कॉन्सेप्ट के साथ रिस्क लेने को तैयार नहीं है। मैं फॉर्मूला का फैन नहीं हूं। मैं कहानियों को फॉलो करता हूं। मैं हर कहानी के साथ खुद को नए सिरे से बनाता हूं। यही एकमात्र फॉर्मूला है, जिसे मैं फॉलो करता हूं’।

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