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परमाणु ताकत बढ़ाने की तैयारी में उत्तर कोरिया, किम जोंग-उन ने यूरेनियम संवर्धन केंद्र का किया दौरा

प्योंगयांग/सियोल। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने हाल ही में शुरू की गई एक परमाणु सामग्री उत्पादन सुविधा का दौरा कर देश की परमाणु क्षमता को और मजबूत करने का संकेत दिया है। इस दौरान उन्होंने परमाणु हथियारों के भंडार को तेजी से बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने गुरुवार को इस दौरे की जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार किम जोंग-उन के साथ सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। हालांकि केसीएनए ने सुरक्षा कारणों से उस सुविधा केंद्र का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया है।

दक्षिण कोरिया के प्रमुख समाचार पत्र ‘द कोरिया टाइम्स’ ने केसीएनए और दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि यह केंद्र यूरेनियम संवर्धन सुविधा हो सकता है। वर्तमान में उत्तर कोरिया के योंगब्योन, कांगसोन और कुसोंग में यूरेनियम संवर्धन केंद्र संचालित हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि किम ने किसी मौजूदा केंद्र का निरीक्षण किया या किसी नए चौथे केंद्र का दौरा किया है।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति का विश्लेषण किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार अभी यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि यह नया परमाणु केंद्र है या पहले से संचालित किसी सुविधा का विस्तार।

किम जोंग-उन ने इस अवसर पर कहा कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर कोरिया की परमाणु सामग्री उत्पादन क्षमता दोगुने से भी अधिक बढ़ चुकी है। उन्होंने इसे संभावित खतरों और दीर्घकालिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया।

उन्होंने कहा कि नया केंद्र देश की परमाणु क्षमता को तेजी से उन्नत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उनके बयान से यह भी स्पष्ट संकेत मिला है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटने के मूड में नहीं है।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2024 में उत्तर कोरिया ने पहली बार अपनी यूरेनियम संवर्धन सुविधा की तस्वीरें और जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार प्योंगयांग की परमाणु गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की बढ़ती परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। वहीं अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान पहले से ही उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

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