नेपाल-भारत के बीच पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते पर हस्ताक्षर, सीमा-पार अपराधों पर संयुक्त कार्रवाई का रास्ता साफ

नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता (Mutual Legal Assistance) से संबंधित महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह पहली बार है जब दोनों देशों ने इस तरह के औपचारिक तंत्र को अंतिम रूप दिया है, जिससे सीमा-पार अपराधों की जांच और साक्ष्य के आदान–प्रदान में तेजी आएगी।
यह समझौता नेपाल के कानून, न्याय तथा संसदीय मामला मंत्रालय में संपन्न हुआ। नेपाल की ओर से सह सचिव विनोदकुमार भट्टराई और भारत की ओर से नेपाल में भारत के राजदूत Navin Srivastava ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
🤝 संयुक्त जांच और साक्ष्य साझा करने का प्रावधान
नेपाल के कानून मंत्री अनिलकुमार सिन्हा और कानून सचिव पाराश्वर ढुंगाना की उपस्थिति में हुए इस समझौते के तहत:
आपराधिक मामलों में साक्ष्यों का आदान–प्रदान
शपथपत्र और बयान दर्ज कराने की सुविधा
नोटिस तामील और अन्य कानूनी सहायता
ट्रांसनेशनल अपराधों में संयुक्त जांच
वित्तीय लेन–देन संबंधी बैंक विवरण प्राप्त करने में सहयोग
अधिकारियों के अनुसार, इससे वित्तीय अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों में धन निवेश की जांच को मजबूती मिलेगी।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नेपाल और भारत के बीच 1953 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी, जिसके तहत अपराधियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया तय की गई थी। हालांकि बाद के वर्षों में व्यावहारिक और राजनीतिक कारणों से वह संधि लगभग निष्क्रिय हो गई।
2003 में भी सचिव स्तर पर प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन अनुमोदन के अभाव में वह लागू नहीं हो सकी। ऐसे में यह नया समझौता दोनों देशों के बीच कानूनी सहयोग के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
🌏 द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता नेपाल-भारत संबंधों को नई मजबूती देगा और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने में सहायक होगा।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत संसद को जानकारी दिए जाने के बाद यह समझौता औपचारिक रूप से लागू होगा।
कुल मिलाकर, यह पहल सीमा-पार अपराध नियंत्रण और न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।






